पीलीभीत बाईपास पर ग्रीन बेल्ट में मदीना शाह की मजार और मस्जिद बनी हुई है। जिसमें करीब आधा दर्जन कमरे हैं। इस धार्मिक स्थल को खानकाह से जुड़ा बताते हैं। ये खंडेश्वरी जटिल संन्यास आश्रम से डेढ़ किलोमीटर पहले है और यूनिवर्सिटी गेट से चंद कदम आगे बढ़कर है। जो कि करीब दो बीघा जमीन में हैं। पहले यहां मदीना शाह ने खानकाह और मस्जिद बनाई, उनके इंतकाल के बाद यहीं पर उनकी मजार भी बना दी गई। बाद में धीरे - धीरे नमाजियों के लिए अवैध तरीके से टीन शेड, वाटर कूलर, स्टोर रूम, तथा कुछ एसी कमरे बना दिए गए। खानकाह, मस्जिद और मजार को छोड़कर बाकी सब अवैध और अतिक्रमण में आता है। जब-जब इस रोड को चौड़ा करने का अभियान चला, तब - तब पीडब्लूडी की ओर से इस धार्मिक स्थल की बाउंड्रीवाल को तोड़ कर अंदर खिसकाया जाता रहा ।
1970 के आसपास पतला रोड बना था । तब मजार सड़क से काफी दूरी थी। 1981 में मजार और पुराने हिस्से की मरम्मत कराई गई , जिसके कुछ हिस्से पर पक्का निर्माण है और कुछ में छत की जगह टीन शेड हैं। इस जगह पर 1985 में नगर निगम ने कई शौचालय बनवाए और एक हैंड पंप भी लगवाया था। 2007 में जब सड़क फोर लेन हुई तब पीडब्ल्यूडी ने यहां की बाउंड्री को तोड़ कर और पीछे करा दिया। उस समय मजार सड़क से सट गया। जिसे अतिक्रमण माना जा रहा है, क्योंकि इस धार्मिक स्थल के कारण ग्रीन बेल्ट खत्म हो गई।
कमेटी का दावा, पुरानी है मस्जिद, खानकाह व मजार
इस धार्मिक स्थल का प्रबंधन कर रही कमेटी के पदाधिकारी डा. सय्यद जियाउल इस्लाम हाशमी, मुशफिक हुसैन व ख्वाजा हसन का कहना है कि खानकाह, मस्जिद और हुजरा 400 साल पुराना है। यहां की मुख्य मजार हजरत बुरहानुल हक कादरी मदनी उर्फ मदीना शाह की है। जो कि नगर निगम के अभिलेखों में 1650 से दर्ज है। जिसकी 1982 में तो मरम्मत की गई। अभी हाल में कुछ कमरे और टिन शेड जरूर डाले गए हैं। इसकी देख भाल सज्जादानशीन फरीदुल इस्लाम हाशमी कादरी चिश्ती 1962 से कर रहे हैं। जुमे की नमाज में जब नमाजियों की संख्या बढ़ने लगी तो मस्जिद में जगह कम पड़ने लगी, तब टीन शीट से घेर कर मजार के बाहरी हिस्से पर एक बरामदा, आंगन वजूखाना बना दिया।
2007 में सड़क चौड़ा करने पर हुआ था बवाल
24 दिसंबर 2007 को इस धार्मिक स्थल की बाउंड्रीवाल को तोड़कर सड़क चौड़ी की तो बवाल हुआ था। कुछ समय तक पीडब्लूडी को निर्माण रोकना पड़ा था, बाद में समझौता हुआ, जिसमें धार्मिक स्थल की कुछ जमीन को शामिल करके सड़क को चौड़ा किया गया।