पीलीभीत जनपद के मशहूर इस्लामिक स्कॉलर मुफ्ती नूर मोहम्मद साजिद हसनी कादरी ने दहेज की जगह शगुन के नाम पर मात्र 11 रुपये लेकर आदर्श विवाह की मिसाल पेश की है।
विवाह समारोह में देश के कई बड़े मुस्लिम धर्मगुरुओं ने शिरकत की। मंडल के तमाम जिलों में घूमकर पीलीभीत और किछौछा शरीफ के उलेमा आदर्श निकाह की मुहिम चला रहे हैं।
पूरनपुर निवासी इस्लामिक स्कॉलर मुफ्ती नूर मोहम्मद साजिद हसनी कादरी ने शनिवार को आदर्श विवाह की मिसाल पेश की। आजमगढ़ जिले के घोसी में हुए निकाह के दौरान उन्होंने दहेज न लेकर शगुन के तौर पर मात्र 11 रुपये लेकर निकाह कबूल किया।
निकाह की सबसे खास बात यह रही कि इसमें फिजूलखर्ची न करते हुए मात्र 11 लोगों ने शिरकत की। इसमें देश के नायब काजी अल्लामा जियाउल मुस्तफा कादरी, मौलाना जाबिर अहमद अशरफी शैखुल अदब जामे अशरफ किछौछा शरीफ, मुफ्ती शाहिद अजहरी बरेली शरीफ, मुफ्ती रिजवान अशरफी किछौछा शरीफ आदि ने हिस्सा लिया।
इस्लामिक स्कॉलर मुफ्ती नूर मोहम्मद हसनी कादरी ने बताया कि इस्लाम में निकाह रस्मो रिवाज नहीं, बल्कि इबादत का दर्जा रखता है। कहा, शरीयत की रोशनी में शादी और निकाह को सादगी के साथ 11 लोगों को ले जाकर करना चाहिए।
मुफ्ती रिजवान अशरफी ने कहा कि नई-नई रस्म, रिवाज और दहेज वगैरह की मांग पर पाबंदी होनी चाहिए। बरेली फैजाने ताजुशशरिया के उस्ताद मुफ्ती शाहिद रजा अजहरी ने कहा है कि उलेमा और इमाम की जिम्मेदारी है कि वह फिजूलखर्ची करने वालों की शादी में हिस्सा लेने न जाएं।
अजमेर शरीफ से आए मौलाना अरशद मिस्बाही ने कहा कि अगर गांव में या मोहल्ले में कोई बैंड बाजे और डीजे वाली शादी करता है तो उसका बॉयकाट करें जब तक तौबा पर आमादा न हो उससे रिश्ता तोड़ लें।