यूपी की पहली आतंकी वारदात पीलीभीत में ही हुई थी। सितंबर 1987 में शाहबाजपुर गांव में एक संत, उनके शिष्य सहित पूरनपुर में दो सिपाहियों को मौत के घाट उतार दिया था।
पीलीभीत में सोमवार तड़के मुठभेड़ में तीन खालिस्तानी आतंकवादियों के मारे जाने की घटना ने 90 के दशक की यादों को ताजा कर दिया है। उस दौर में तराई इलाके में छिपे तौर पर संचालित आतंकवादी गतिविधियां वर्ष 1987 के आसपास खुलकर सामने आने लगीं थीं।
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आठ सितंबर 1987 को आतंकवादियों ने एक संत, उनके एक शिष्य सहित दो सिपाहियों को मौत के घाट उतार दिया था। इसे प्रदेश में पहला आतंकवादी दुस्साहस करार दिया गया था। अमर उजाला के पुराने पन्नों से भी इसकी पुष्टि होती है।
10 सितंबर 1987 के अंक में अमर उजाला ने पहले पन्ने पर उप्र में पहला आतंकवादी दुस्साहस: पीलीभीत में आतंकवादियों ने संत, दो सिपाहियों सहित चार मारे शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी।
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घटना आठ सितंबर की देर रात लखीमपुर खीरी जनपद की ओर शाहबाजपुर गांव में घटी थी। पांच आतंकवादी दो गुटों में आश्रम के समीप स्थित पुलिया पर बैठे ग्रामीणों से पता पूछकर डेरा उदासीन आश्रम वाले बाबा ज्योति प्रकाश के पास पहुंचे थे। बाबा ज्योति प्रकाश एक हिंदू संत थे, मगर उनके अनुयायियों में सिख ज्यादा थे।
आतंकियों ने संत से रुपये लौटाने के लिए कहा था
आश्रम में घुसे आतंकवादियों ने बाबा पर गुरु गोबिंद सिंह का अपमान करने का आरोप लगाया। बाबा ज्योति प्रकाश और उनका एक शिष्य हाल ही में पंजाब के गुरदासपुर से लौटे थे। आतंकवादियों ने पंजाब से लाए गए रुपये लौटाने के लिए कहा।
इन्कार करने पर तलवार से बाबा की हत्या कर दी थी। बचाने आए सिख अनुयायी बाज सिंह उर्फ हाजिर दास को भी गोली मार दी थी। बाबा की जीप और नकदी भी लूट ले गए थे। आश्रम में मौजूद अन्य लोगों को एक कमरे में बंद कर दिया था।
छोड़ा था ''भिंडरावाले टाइगर फोर्स'' का एक खाली लेटरपैड
पूरनपुर कस्बे से दो किलोमीटर आगे कंस ध्वजा पर गश्त कर रहे सिपाही उमेशपाल सिंह व लक्ष्मीकांत तिवारी को गोलियों से भून दिया था। भागते हुए आतंकवादी सिपाहियों के शव के पास ''भिंडरावाले टाइगर फोर्स'' का एक खाली लेटरपैड भी छोड़ गए थे।
आतंकवादियों ने थोड़ा आगे बढ़ने पर थाना बंडा के अंतर्गत डिबिया खुर्द में टेढ़ी पुलिया पर खड़े एक और सिपाही पर भी गोलियों की बौछार की थी, मगर वह बच गया था। घटना के बाद प्रदेश के गृहमंत्री गोपीनाथ दीक्षित व पुलिस महानिदेशक राजनाथ गुप्त भी पीलीभीत पहुंचे थे।
15 दिन पहले की थी सिपाही की हत्या
इस घटना से 15 दिन पहले आतंकवादियों में डिबिया खुर्द रेलवे स्टेशन के पास भी एक सिपाही की हत्या कर दी थी। एक अन्य सिपाही घायल हुआ था। आम लोगों ने इसे आतंकवादी कृत्य ठहराया, मगर पुलिस ने इसे आम आपराधिक घटना ही माना।