स्टॉफ की लापरवाही और एंबुलेंस न मिलने से एक गर्भवती की जान सांसत में पड़ गई। करेली एडिशनल पीएचसी सुबह दस बजे तक खाली रही। यहां कोई स्टॉफ नहीं था। इंतजार करते- करते गर्भवती महिला प्रसव पीड़ा से तड़पती रही। साथ आई आशा ने एंबुलेंस सेवा को फोन किया तो मदद नहीं मिली। आखिरकार टेंपो में लादकर गर्भवती को जिला महिला अस्पताल लाया गया जहां 15 मिनट बाद उसका प्रसव हो गया।
कलेरी चर्च के सामने रहने वाले राजू की पत्नी आशा (27) को सुबह आठ बजे प्रसव पीड़ा शुरू हुई। पति ने तुरंत आशा मीना साहू को फोन किया। मीना तुरंत गर्भवती आशा को लेकर कलेरी एडिशनल पीएचसी पहुंची। यहां कोई स्टॉफ नहीं था। मीना ने बताया कि उन्होंने यहां तैनात स्टॉफ नर्स को फोन किया लेकिन आने में एक घंटे से ज्यादा समय लगा दिया। एंबुलेंस108 और 102 पर फोन किया लेकिन रिस्पांस नहीं मिला। तुरंत मीना ने टेंपो कर आशा को जिला महिला अस्पताल में भर्ती कराया। यहां 15 मिनट बाद ही प्रसव हो गया।
मीना न बुलाती टेंपो तो जान थी खतरे में
108 पर आशा ने फोन किया तो आईडी न होने के चलते उन्होंने गर्भवती को लाने से मना कर दिया। 102 पर फोन किया तो घंटी जाने के बाद भी रिस्पांस नहीं मिला। आशा मीना साहू अगर टेंपो न बुलाती तो जच्चा बच्चा की जान खतरे में पड़ जाती। महिला अस्पताल की डॉक्टरों ने तुरंत स्थिति संभाली।
आखिर क्यों नहीं मिली एंबुलेंस
तमाम दावे किए गए। एंबुलेंस को लेकर बैठक और सेमिनार तक हुए। लेकिन फिर भी कमी दिख रही है। आशा के मामले में 108 तो पहले ही पीछे हट गई। 108 गर्भवती महिला को नहीं ले जा सकते। लेकिन कुछ छूट भी है, बावजूद इसके एंबुलेंस बुलाने पर नहीं आई। 102 पर आशा ने फोन मिलाया, घंटी के बाद कोई रिस्पांस नहीं मिला।
करेली एडिशन पीएचसी की हालत खराब
क्यारा ब्लाक के एडिशनल पीएचसी की हालत खराब है। बताते हैं कि यहां स्टॉफ हमेशा नदारद रहता है। गर्भवती से जुड़े मामलों में फोन करके बुलाना पड़ता है।
मैं बाहर हूं, लेकिन मुझे जानकारी मिल गई है। यह गंभीर मामला है। गर्भवती महिलाआें जुड़े मामलाें में लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। स्टॉफ पर कार्रवाई होगी।
डॉ. विजय यादव, सीएमओ