क्रीम के तौर पर प्रयोग किए जा सकेंगे पेपटाइड
डॉ. श्रीवास्तव के मुताबिक अब तक मालीक्यूल को किसी घाव या जलने के कारण इंफेक्शन होने पर क्रीम के तौर पर विकसित कर लिया है। क्लीनिकल ट्रायल के लिए एक फार्मा इंडस्ट्री से वार्ता चल रही है। अगर सब ठीक रहा तो जल्द ही ट्रायल शुरू होगा। परिणाम उम्मीद के अनुसार होने पर क्रीम के तौर इसका प्रयोग किया जा सकेगा। उन्होंने भविष्य में मालीक्यूल्स को इंजेक्शन के तौर पर प्रयोग करने की उम्मीद जताई।
मालीक्यूल्स खोजने की क्यों पड़ रही है जरूरत
साल 1927 में ‘पेनिसिलीन’ के तौर पर पहली एंटीबायोटिक खोजी गई थी। फिर करीब सौ साल तक एंटीबायोटिक पर शोध कार्य जारी रहे। इसी दौरान जब नई एंटीबायोटिक विकसित हुई तो जीवाणुओं ने इसके हमले से खुद को बचाने के लिए प्रतिरोधक क्षमता विकसित करते रहे। लिहाजा, दो एंटीबायोटिक के कॉम्बिनेशन प्रयोग किए जाने लगे। यह भी कारगर रहा। इससे निपटने के लिए भी जीवाणुओं ने खुद को ढाला।
30 वर्षों में नई क्लास की एंटीबायोटिक नहीं खोजी गई
बताया कि पिछले करीब 30 सालों में कोई नई एंटीबायोटिक नहीं आई है। पुरानी एंटीबायोटिक के प्रति जीवाणुओं ने प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर ली है। वजह रही कि फार्मा इंडस्ट्रीज ने इसके बजाय एंटी कैंसर, एंटी वायरल, एंटी डायबेटिक, न्यूरो ड्रग आदि पर ज्यादा जोर दिया। वर्तमान में पुरानी एंटीबायोटिक खाई जा रही है जो बेअसर हैं। लिहाजा, डोज बढ़ती जा रही है। इसलिए वैज्ञानिक अब नए तरीके खोज रहे हैं। पिछले दिनों देहरादून में यूनीसेफ की ओर से आयोजित वर्चुअल वर्कशॉप में भी एंटीबायोटिक के बढ़ते प्रयोग और दुष्प्रभाव पर विशेषज्ञों ने चिंता जाहिर की थी।