शब-ए-बरात पर शहर के कब्रिस्तानों और दरगाहों पर सजावट की गई। तमाम लोग ने कब्रिस्तानों में अपने बुजुर्गों की कब्रों पर चिरागां और गुलपोशी कर फातेहा, दुरूद पेश किया।
बरेली में शब-ए-बरात का त्योहार अकीदत, एहतराम के साथ मनाया गया। दरगाहों और कब्रिस्तानों में हाजिरी देने वालों की भीड़ रही। तमाम लोगों ने रातभर इबादत कर अपने गुनाहों की माफी मांगी।
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शब-ए-बरात को लेकर मंगलवार को शहर के कब्रिस्तानों और दरगाहों पर भारी सजावट की गई। तमाम लोग ने कब्रिस्तानों में अपने बुजुर्गों की कब्रों पर चिरागां और गुलपोशी कर फातेहा, दुरूद पेश किया। दरगाहों पर हाजिरी देकर गुलपोशी, चादरपोशी कर नियाज नजर पेश की।
इसमें दरगाह आला हजरत, दरगाह अजहरी, खानकाह नियाजिया, दरगाह बशीर मियां, दरगाह शाहदाना वली, दरगाह शाह शराफत मियां, दरगाह वली मियां, खानकाह वामिकिया निशातिया, दरगाह तहसीनी आदि पर लोग पहुंचते रहे।
इधर, शहर के कोहाड़ापीर, शाहबाद, चौपुला, किशोर बाजार, श्यामगंज, सेमल खेड़ा, बियाबनी, पुराना शहर के कांकर टोला, चक महमूद, नवादा शेखान, किला के हुसैन बाग, किला रोड आदि कब्रिस्तानों पर रातभर भीड़ पहुंचती रही। इससे पूरी रात सड़कों पर चहल-पहल बनी रही।
इसके अलावा तमाम लोग घरों से लेकर दरगाहों और खानकाहों तक इबादत के लिए बैठे। इसमें नफिल नमाज, दुरूद, कुरान की तिलावत करते रहे। दिन में तमाम घरों में हलवा व अन्य पकवान बना कर नियाज नजर का आयोजन किया गया।
वहीं, दरगाह आला हजरत के मीडिया प्रभारी नासिर कुरैशी ने बताया कि दरगाह पर हाजिरी देने आने वाले लोगों ने दरगाह प्रमुख मौलाना सुब्हान रजा खां (सुब्हानी मियां) और सज्जादानशीन मुफ्ती अहमन रजा खां कादरी से मुलाकात कर दुआएं भी कराईं।