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सर्वोच्च अदालत के फैसले से जनता खुश, कहा - खत्म होें सड़कों पर धरना-प्रदर्शन और जुलूस

Fri, 09 Oct 2020 02:05 AM IST
बरेली ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, बरेली

सार

शाहीन बाग मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक रास्ते पर कब्जे और धरने को बताया है गलत
 
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के शाहीन बाग में हुए धरने के खिलाफ दायर की गई याचिका पर निर्णय देते हुए साफ कर दिया है कि सार्वजनिक रास्ता रोककर प्रदर्शन करना किसी भी तरह बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। देश की सबसे बड़ी अदालत साफ कर चुकी है कि सार्वजनिक स्थान या रास्तों को अनिश्चितकाल के लिए रोका या कब्जाया नहीं जा सकता, चाहे वह शाहीन बाग हो या कोई अन्य जगह। सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय का कानून के जानकारों और समाज के विभिन्न वर्गों ने स्वागत किया है। पब्लिक का कहना है कि आए दिन सड़कों पर होने वाले प्रदर्शन, जुलूस और धार्मिक आयोजन को भी बंद होना चाहिए क्योंकि इससे आवागमन बाधित होता है। कई बार तो इनसे लगे जाम में एंबुलेंस फंस जाती हैं और इलाज मिलने से पहले ही मरीज दम तोड़ देते हैं।

सार्वजनिक स्थानों पर अवैध कब्जे नहीं होने चाहिए। शाहीन बाग प्रकरण के जरिये सुप्रीम कोर्ट ने संदेश दिया है कि सार्वजनिक रास्तों पर कोई भी ऐसा अतिक्रमण न हो, जिससे आवागमन बाधित होता हो। मंदिर, मस्जिद, गिरिजाघर या कोई भी धर्मस्थल हो, वह सड़क पर नहीं होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने इसे पसंद नहीं किया है। - बीसी सक्सेना, रिटायर्ड जिला जज

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रास्ते आवागमन के लिए बनाए जाते हैं, इन पर अतिक्रमण कर व्यापार या अन्य गतिविधियां नहीं होनी चाहिए। इन्हें जनता के पैसे से सार्वजनिक प्रयोग के लिए बनाया जाता है। सड़क पर धार्मिक आयोजन और विरोध प्रदर्शन रुकने ही चाहिए। धार्मिक आयोजन तो घर या निर्धारित जगह पर ही किए जाएं। - डॉ. प्रदीप कुमार, एसोसिएट प्रोफेसर, बरेली कॉलेज
सुप्रीम कोर्ट का इस संबंध में आया निर्णय सर्वथा उचित है। रास्ते पर बाधा पैदा कर आवागमन अवरुद्ध करना गलत है। इससे सीआरपीसी की धारा 133 का उल्लंघन होता है। इसमें आम आदमी को होने वाली समस्या का वर्णन किया गया है। इस तरह की दिक्कत होने पर आम आदमी कार्यपालक मजिस्ट्रेट से शिकायत कर सकता है। - घनश्याम शर्मा, अध्यक्ष, बरेली बार एसोसिएशन
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इससे पहले ओल्गा टेलिस के मामले में भी ऐसा ही निर्णय हुआ था। सड़क का निर्माण लोगों के चलने-फिरने के लिए हुआ है। इस पर प्रदर्शन और अतिक्रमण से सार्वजनिक विकास बाधित हो जाता है। प्रदर्शन का अर्थ यह बिल्कुल नहीं है कि आप रास्ते को अवरुद्ध कर दें, शिकायत दर्ज कराने के बाद इसे खत्म कर देना चाहिए। -डॉ. अमित सिंह, विभागाध्यक्ष (विधि), रुहेलखंड विश्वविद्यालय

जनता के अधिकारों का हनन है सड़क और चौराहों की मनमानी खुदाई

बरेली। शहर में इन दिनों जगह-जगह निर्माण कार्य चल रहे हैं, जिसकी वजह से यातायात अवरुद्ध है। बिना योजना और विभागों में आपसी तालमेल के अभाव में हो रहे ये विकास कार्य आम जनता के लिए मुसीबत का सबब बन गए हैं। अव्यवस्था का आलम यह है कि शहर की कई सड़कें लंबे समय से बंद पड़ी हैं और उसका कोई उचित विकल्प भी नहीं तैयार किया गया है। कानून के जानकारों का कहना है कि विभागों की मनमानी से जनता को होने वाली परेशानी सीआरपीसी की धारा 133 का उल्लंघन है।

इन दिनों चौपुला पर सेतु निगम फ्लाईओवर बना रहा है और जल निगम सीवर लाइन डालने का काम कर रहा है। इससे बीएसएनएल की टेलीफोन लाइन, सीयूजीएल की गैस पाइपलाइन, नगर निगम की पानी की लाइन और स्ट्रीट लाइट अस्त व्यस्त हो गई हैं। सड़क भी पूरी तरह से खत्म हो गई है। वर्ष 2018 में शुरू हुआ चौपुला फ्लाईओवर का निर्माण कार्य अब तक पूरा हो जाना चाहिए था लेकिन विभागीय तालमेल न होने से यहां लंबे समय से मार्ग अवरुद्ध है। इन दिनों तो यातायात को लेकर बहुत ही दिक्कत बढ़ गई हैं। ऐसे ही कालीबाड़ी में सीवर लाइन डाली जा रही है, जिससे वहां की सड़क बंद है और आए दिन पानी की सप्लाई भी बाधित हो जाती है। चौपुला पर तो लोगों के आवागमन के लिए कामचलाऊ वैकल्पिक व्यवस्था की गई है लेकिन कालीबाड़ी में कोई इंतजाम नहीं है। नगर निगम के सामने वाले रोड और पटेल चौक से चौपुला चौराहे पर भी एक साइड की लेन पूरी तरह बंद है। इससे यहां की जनता को लंबे समय से परेशानी उठानी पड़ रही है।

यह कहती है सीआरपीसी की धारा 133

प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक ऐसा कोई भी कार्य जिससे आम जनता को दिक्कत होती हो, वह दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 133 के उल्लंघन की श्रेणी में आता है। इसमें अतिक्रमण, मार्ग बंद करना आदि शामिल हैं। इसमें आम जनता का व्यक्ति एसडीएम कोर्ट में शिकायत दे सकता है और कोर्ट उसे हटाने का आदेश जारी करती है। सेवानिवृत्त जिला जज बीसी सक्सेना के मुताबिक निर्माण एजेंसियों को कोई भी कार्य शुरू कराने से पहले सर्विस लेन बनानी चाहिए ताकि आवागमन बाधित न हो। जनता के आवागमन में बाधा सीआरपीसी की धारा 133 के उल्लंघन में शामिल है। वरिष्ठ अधिवक्ता एवं बार एसोसिएशन के अध्यक्ष घनश्याम शर्मा के मुताबिक इन दिनों विभागीय तालमेल के अभाव में विभिन्न प्रोजेक्ट को लेकर शहर की तमाम सड़कें बंद कर रखी हैं। यह भी सीआरपीसी की धारा 133 का उल्लंघन है क्योंकि अफसरों ने जनता की सहूलियत को देखे बिना काम शुरू कर दिया है, कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई है।
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