केस एक, मूर्ति नर्सिंग होम से प्रेमनगर जाने वाले मार्ग पर देवी देवताओं की मूर्तियां स्थापित करने के बाद कब्जेदारों ने अपना धंधा चलाने के लिए सीआई पार्क की दीवार से सटाकर पूरी अवैध मार्केट बना दी।
केस दो, पीलीभीत बाईपास पर सेटेलाइट से फिनिक्स माल तक एनएचएआई की ग्रीन बेल्ट की जमीन पर मंदिर, मजार और मस्जिद बनाकर बाकायदा पूजा और इबादत के नाम पर दुकानें चलने लगीं। रिठौरा में नेशनल हाइवे की जमीन पर मस्जिद बनकर खड़ी हो गई।
केस तीन, शहामतगंज से सेटेलाइट रोड के बीच ईसाइयों की पुलिया के निकट सरकारी जमीन पर पहले मंदिर बनाकर पूजा अर्चना शुरू हुई। फिर यहां आठ से ज्यादा अवैध दुकानें बन गईं। बीडीए धर्म के नाम पर बने इस अवैध निर्माण को गिराने की हिम्मत नहीं जुटा पाया।
भक्तों की दलील अपनी जगह है लेकिन सुप्रीमकोर्ट की टिप्पणी से कोई असहमत नहीं हो सकता कि धंधे के लिए लोग आस्था का सहारा लेकर सड़कें कब्जा रहे हैं। कोर्ट ऐसे अतिक्रमण हटाने को कह चुका है। बरेली में तो धर्म के नाम पर रोज सड़क और नाले नालियों पर कब्जे हो रहे हैं। प्रशासन, नगर निगम, बीडीए, पीडब्ल्यूडी और एनएचएआई ने न तो सरकारी जमीन पर धार्मिक स्थलों के अतिक्रमण की संख्या चिह्नित की और न ही उनको हटाने की हिम्मत जुटा पा रहे हैं।
अमर उजाला ने मंदिर, मस्जिद या मजार जैसे धार्मिक स्थलों की आड़ में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे के विरुद्ध पिछले महीने अभियान चलाकर प्रशासन, नगर निगम और बीडीए के अफसरों का ध्यान खींचा था। फिलहाल तो किसी भी अफसर की नींद नहीं टूटी। बीडीए ने पांच साल पहले अनाधिकृत रुप से बनने वाले धार्मिक स्थलों का चिह्नीकरण कराया था, उसमें तीन सौ से ज्यादा अनाधिकृत निर्माण धर्म स्थल के नाम पर बने पाए गए थे। अब इनकी संख्या बढ़कर दो गुनी से ज्यादा होने का अनुमान है। नगर निगम ने चार साल से इनका चिह्नांकन कराने तक की जरूरत नहीं समझी। इसके परिणाम स्वरूप अब मॉडल टाउन रोड पर शहामतगंज से डेलापीर होते हुए बैरियर टू तक, पीलीभीत बाईपास पर सेटेलाइट से रिठौरा, रजऊ परसपुर से सेटेलाइट होते होतु खुर्रम गौंटिया, चौकी चौराहा, किला, परसाखेड़ा, कालीबाड़ी रोड के अलावा अधिकांश मार्गों पर देवी देवताओं के मंदिर, मजार या मस्जिद बन चुके हैं।
पीलीभीत बाईपास पर 36 अवैध निर्माण
नेशनल हाइवे अथारिटी ऑफ इंडिया ने सेटेलाइट से रिठौरा तक 36 अवैध निर्माण हाइवे की ग्रीन बेल्ट की जमीन पर चिह्नित किए हैं। इनमें 15 से ज्यादा धार्मिक स्थल हैं। रिठौरा में प्रशासन ने एक दिन अतिक्रमण हटाने की खानापूरी भी। फरीदपुर में भी सड़क की राह में आ रही मजार भी राजनीतिक विवाद के चलते नहीं हट पाई।
‘किसी भी तरह का अतिक्रमण हटाना प्रशासन का काम है। नगर निगम उसमें मशीनों और श्रम उपलब्ध कराकर सहयोग करता है। उच्च स्तर पर रणनीति बने तो हमें अनाधिकृत धर्म स्थलों का अतिक्रमण हटाने में कोई परेशानी नहीं।’
शीलधर सिंह यादव, नगर आयुक्त
‘हमने ईसाइयों की पुलिया पर अतिक्रमण हटाने को टीम भेजी तो पुलिस नहीं मिल पाई। धर्मस्थलों का अतिक्रमण हटाना बिना प्रशासनिक रणनीति के संभव नहीं है। प्रशासन सभी विभागों से समन्वय बनाए तो बीडीए भी अपने काम में पीछे नहीं हटेगा।’ डा. शशांक विक्रम सिंह, उपाध्यक्ष बीडीए