मरीजों को इलाज न मिलने पर तीमारदारों ने किया हंगामा
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डॉक्टर पर अभद्रता करने का आरोप
सुबोध गुप्ता के परिवार से भी बुखार पीड़ित भर्ती हैं। उनका कहना है कि दो दिन के बाद भी इलाज तो दूर जांच रिपोर्ट तक नहीं मिली है। जब डॉक्टर से पूछा तो उन्होंने कह दिया कि दूसरा डॉक्टर बताएगा। तबीयत बिगड़ने की बात कही तो डॉक्टर ने अभद्रता करते हुए कह दिया कि मरीज को कहीं और ले जाओ। मेरी जिम्मेदारी नहीं है। कई और मरीजों के साथ ऐसा व्यहार हुआ तो माहौल बिगड़ गया। तीमारदारों का गुस्सा देखकर डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टॉफ भी यहां से किनारा कर गया। इसके बाद देर रात तक अस्पताल में हंगामा होता रहा।
जिम्मेदार बुखार और डेंगू के मरीजों को लेकर कितने संजीदा हैं, इसका अंदाजा इसी बता से लगाया जा सकता है कि चार दिन में डेंगू के 107 नए मरीज मिल चुके हैं। इस बीच जिला और जिला महिला अस्पताल के डेंगू वार्ड में उपलब्ध बेडों की संख्या 40 ही है। हालात बेकाबू होते जा रहे हैं।
रात में एक ईएमओ के भरोसे अस्पताल
मरीजों की जान सांसत में है और तीमारदार परेशान हो रहे हैं। रात में जिला अस्पताल को एक ईएमओ के भरोसे छोड़ दिया जाता है। कई मरीजों के तीमारदारों का आरोप है कि डॉक्टर उनको सलाह देते हैं कि मरीज को निजी अस्पताल ले जाएं। वे निजी अस्पतालों के नाम भी सुझाते हैं। तीमारदारों ने बताया कि डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ मनमानी के साथ अभद्रता भी कर रहे हैं।
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जिला अस्पताल के डॉक्टरों पर शराब पीकर रात में चौराहों पर हंगामा, बवाल व पुलिस से मारपीट के आरोप भी हैं। 17 अगस्त की रात जिला अस्पताल के डॉ. राहुल वाजपेयी और डॉ. वैभव शुक्ला ने पैरामेडिकल स्टाफ के साथ सौ फुटा रोड पर बवाल किया था। मारपीट और हंगामा के बीच महिला कांस्टेबल के साथ छेड़खानी भी की थी। डॉ. राहुल वाजपेयी भी जिला अस्पताल में ईएमओ पद पर हैं। ऐसे में जिला अस्पताल के बेलगाम स्टाफ को लेकर अक्सर उंगलियां उठती रहती हैं।
सीएमएस डॉ. अलका शर्मा ने बताया कि हंगामा जैसी कोई सूचना नहीं मिली है। कुछ लोगों की शिकायत थी। ड्यूटी पर तैनात ईएमओ डॉ. शैलेश रंजन से मैंने बात की है। किसी भी मरीज और तीमारदार को समस्या नहीं होने दी जाएगी। अगर किसी की लापरवाही सामने आती है तो कार्रवाई की जाएगी।