धुंध से नसों पर चिपक रही धूल संक्रमण की वजह
चेस्ट फिजिशियन डॉ. हरपाल सिंह के मुताबिक, सर्दियों में ब्रेन स्ट्रोक के मरीज बढ़े हैं। गले में संक्रमण के भी सौ मरीज रोज पहुंच रहे हैं। जब घना कोहरा होता है तो धूल के कण हवा में तैरते रहते हैं। इससे धुंध होती है। ये कण सांस के साथ फेफडों और नसों पर चिपक जाते हैं। इससे संक्रमण होता है। नसों के सिकुड़ने से सांस फूलने की समस्या होती है। गुनगुना पानी पीने से गले में संक्रमण, हृदय और मस्तिष्क संबंधी रोगों की आशंका नहीं रहती।
पतले कंबल में ठिठुरते गुजर रही रात
मरीज वसीम ने बताया कि एक पतले से कंबल में रात ठिठुरते हुए गुजरी। गर्म पानी मांगा तो स्टाफ ने पहले मना किया, फिर बाहर से लाने का सुझाव दिया। खाना भी खाया नहीं जा सका। तीमारदार राजकुमारी ने बताया कि मां को सांस की समस्या है। डॉक्टर ने गुनगुना पानी पिलाने के लिए कहा है। कैंटीन से दस रुपये में एक लीटर पानी गर्म करवाकर पिला रही हूं।
प्रभारी एडी एसआईसी डॉ. अजय मोहन ने बताया कि कोल्ड वेव रूम में भर्ती मरीजों काे ही गर्म पानी दिए जाने की व्यवस्था है। इमरजेंसी या अन्य वार्ड में भर्ती मरीजों के लिए गर्म पानी की व्यवस्था नहीं है। सर्दियों में गर्म पानी जरूरी है। इसके लिए अलग से व्यवस्था कराई जाएगी।