क्रोध में उठाए कदमों का पछतावा भी नहीं, मनोवैज्ञानिक केंद्र तक पहुंच रहे मामले
बरेली। जेन-जी निरंकुश भावनाओं और आक्रामकता की चपेट में हैं। उनको क्रोध के दौरान उठाए गए कदमों का पछतावा भी नहीं होता। मंडलीय मनोवैज्ञानिक केंद्र के आंकड़े इसकी पुष्टि कर रहे हैं। यहां पहुंच रहे अभिभावक अपने बच्चों के आक्रामक व्यवहार से परेशान हैं। उनका कहना है जब वे बच्चों को डांटते हैं तो सुधारने के बजाय उनका व्यवहार आक्रामक हो जाता है। मनोवैज्ञानिक केंद्र की काउंसलर यशिका वर्मा इसे अभिभावकों के व्यवहार का असर बताती हैं। उन्होंने कहा कि अभिभावकों के गर्म मिजाज को देखकर बड़े हो रहे बच्चे युवावस्था में आक्रामक हो जाते हैं। काउंसलर रविंद्र कुमार ने बताया कि सितंबर में युवाओं की आक्रामकता के 12 मामले आए हैं।
प्रोफेसर ने डांटा तो चुरा लिया लैपटॉप
22 वर्षीय बेटे के साथ मनोवैज्ञानिक केंद्र आए अभिभावक ने बताया कि प्रोफेसर के डांटने पर बेटे ने क्लास से ही उनका लैपटॉप चोरी कर लिया। इसकी शिकायत मिलने पर उन्होंने बेटे से पूछताछ की। बेटे ने बताया कि उसने चोरी नहीं की, केवल लैपटॉप उठाया है, जिसे वह कल लौटा देता। इस मामले की गंभीरता को समझते हुए पिता बेटे को मनोवैज्ञानिक केंद्र ले आए।
बेटे ने पिता को दे दिया धक्का
सुरेश शर्मा नगर निवासी अभिभावक अपने 16 वर्षीय बेटे को काउंसलिंग के लिए ले आए। पिता ने बताया एक दिन उन्होंने अपने बेटे को एक साधारण कार्य करने के लिए कहा, लेकिन वह इतने में ही बिगड़ गया। जब पिता ने दबाव बनाना चाहा तो बेटे ने उन्हें धक्का दे दिया। बाद में पूछने पर बेटे ने बताया जो मेरे साथ करेंगे, वैसा ही मैं भी करूंगा।
मुझे अपने किए पर अफसोस नहीं
प्रेमनगर निवासी अभिभावक ने अपने 20 वर्षीय बेटे को किसी काम के लिए टोका तो वह आक्रामक हो गया। यहां भी जब पिता ने बेटे को मारना चाहा तो बेटे हे उन्हें धक्का दे दिया। काउंसलिंग में बेटे ने बताया कि पिता हमेशा मेरे साथ ऐसा ही व्यवहार करते हैं। कभी मुझ पर विश्वास नहीं किया। अब जो मैंने किया है, मुझे उसका अफसोस नहीं है।
बेटी का व्यवहार सामान्य नहीं
सुभाषनगर की महिला अपनी 14 वर्षीय बेटी को लेकर पहुंची। बताया कि बेटी दिन-रात फोन चलाती है। हालांकि, अब यह आम हो चला है, लेकिन मना करने पर बेटी कहती है कि अपनी जिंदगी वह अपने हिसाब से जिएगी। ऐसे शब्दों से आहत मां को लगा कि बेटी का व्यवहार सामान्य नहीं है। इसलिए उसकी काउंसलिंग करा रही है।
जानिए, क्या होता है जेन-जी
वर्ष 1997 से 2012 के बीच जन्मे बच्चे जेन-जी की श्रेणी में आते हैं। संवाद