पूरे प्रदेश में चली भगवा लहर में बिथरी से राजेश कुमार मिश्रा उर्फ पप्पू भरतौल भी चुनाव जीत गए। सवर्णों के अलावा पिछड़ी और दलित जातियां भी कमल निशान पर चली गईं। भाजपा विरोधी वोटों का बड़ा हिस्सा सपा प्रत्याशी वीरपाल सिंह यादव के पक्ष में जाने से चुनाव से पहले सबसे मजबूत माने जाने वाले बसपा प्रत्याशी वीरेंद्र सिंह को करारी हार का मुंह देखना पड़ा।
संतोष गंगवार की पसंद पर बिथरी से भाजपा ने राजेश कुमार मिश्रा उर्फ पप्पू भरतौल को टिकट दिया था। बसपा के मौजूदा विधायक वीरेंद्र सिंह और सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष वीरपाल सिंह यादव के सामने उनको काफी कमजोर आंका जा रहा था। मगर, मतदान तक पप्पू भरतौल के पक्ष में मौर्य, लोध, कश्यप, साहू राठौर के अलावा ठाकुर और काफी संख्या में यादव वोट भी भाजपा के पक्ष में एकजुट हो गया। वीरपाल और वीरेंद्र सिंह मुस्लिम वोट हासिल करने के लिए गोटियां बिछाते रहे। भाजपा विरोधी वोटों का बड़ा हिस्सा वीरपाल के पक्ष में जाने से वीरेंद्र की स्थिति कमजोर हो गई। पप्पू के पक्ष में कमजोर जातियां एकजुट होती गईं। वीरपाल और वीरेंद्र की लड़ाई बिथरी और क्यारा तक सीमित रह गई जबकि पप्पू भरतौल को मुस्लिम बहुल बिथरी में भी उम्मीद से ज्यादा 17 हजार वोट मिले जबकि क्यारा, मझगवां, क्यारा और आलमपुर जाफराबाद में निर्णायक बढ़त बनाकर चुनाव जीत गए। मतगणना के पहले आठ राउंड में पप्पू भरतौल तीसरे नंबर पर चल रहे थे लेकिन 14 वें राउंड के बाद पप्पू ने जो बढ़त हासिल की, वह जीत तक बढ़ती ही चली गई।