कोलाघाट पैंटून पुल से निकलते लोग । संवाद
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शाहजहांपुर। कोलाघाट पर पैंटून पुल का बहुप्रतीक्षित पुनर्निर्माण कार्य 19वें दिन रविवार शाम को पूरा हो गया। लोक निर्माण विभाग के ठेकेदार ने हवन-पूजन के बाद पुल जनता को समर्पित कर दिया। पुल पर आवागमन शुरू होने से जलालाबाद व मिर्जापुर क्षेत्र के कटरी में बसे गांवों के लोग काफी खुश हैं।
गत 29 नवंबर को कोलाघाट के पक्के पुल का सातवां पिलर जमीन में धंस जाने के बाद पुल टूटकर तीन हिस्सों में बंट गया था। इससे जलालाबाद, कलान और मिर्जापुर क्षेत्र के लगभग 200 गांवों का न सिर्फ आपसी, बल्कि जिला मुख्यालय से संपर्क कट गया था। क्षेत्रवासियों की मांग पर प्रशासन ने 95 लाख की लागत से कोलाघाट में टूटे हुए पक्के पुल के समानांतर पैंटून पुल बनाने की स्वीकृति दी थी। लोक निर्माण विभाग ने गत 17 दिसंबर को जलदबाजी में पैंटून पुल तैयार कर जनता को समर्पित कर दिया, क्योंकि अगले दिन जिला मुख्यालय पर प्रधानमंत्री की रैली होनी थी।
जल्दबाजी में लकड़ी के पुराने स्लीपर से बनाया गया पैंटून पुल दस दिन बाद ही बोल्ट टूटने और स्लीपर खिसकने से क्षतिग्रस्त हो गया। इससे एक बार फिर क्षेत्रवासियों को नाव से रामगंगा नदी से आवागमन करना पड़ा। इस बीच, दो बार रामगंगा में नाव पलट जाने से प्रशासन में खलबली हो गई। मजबूरन लोनिवि को पुराने लकड़ी के स्लीपर की जगह रायपुर (छत्तीसगढ़) स्थित वन विभाग के काष्ठ डिपो से 292 नए स्लीपर मंगवाने पड़े।
पैंटून पुल निर्मित करने वाले ठेकेदार नसरुद्दीन ने सहयोगी अभिषेक कुमार, आनंद कुमार, मेठ जलालुद्दीन के साथ पुल पर हवन-पूजन कर उसे यातायात के लिए खोल दिया। पैंटून पुल चालू हो जाने से न केवल क्षेत्रवासियों बल्कि ढाईघाट माघ मेले में पौष पूर्णिमा से कल्पवास करने वाले श्रद्घालुओं में भी खुशी है।