संस्करण दर संस्करण समृद्ध हुई भाषा
पंडित जी और उनके रामायण की प्रसिद्धि सरहदों की हद पार कर विदेश तक पहुंची। अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ नॉर्थ कैरोलिना की एसोसिएट प्रोफेसर पॉमेला यहां शोध करने आ पहुंचीं। इसके लिए उन्होंने हिंदी सीखी। अपने शोध में उन्होंने पाया कि राधेश्याम रामायण के शुरुआती संस्करणों में उर्दू के शब्दों की अधिकता रही। बाद में संस्करण दर संस्करण पंडित जी ने इसकी भाषा को परिमार्जित और परिष्कृत किया। जैसे-जैसे नए संस्करण बाजार में आते रहे, उर्दू की जगह हिंदी के शब्द स्थान पाते रहे। 1950-60 में जो संस्करण प्रकाशित हुआ, उसमें शुद्ध हिंदी के शब्दों का प्रयोग किया गया है।
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नेपाल नरेश ने दी थी कथा वाचस्पति की उपाधि
पंडित राधेश्याम कथावाचक का जन्म 25 नवंबर 1890 को बरेली शहर के बिहारीपुर मोहल्ले में हुआ था। वह समाज की पसंद-नापसंद से वाकिफ थे। इसीलिए उनकी रचनाएं काफी लोकप्रिय हुईं। 1922 में लाहौर में आयोजित विश्व धर्म सम्मेलन का शुभारंभ उनके लिखे मंगलाचरण से ही हुआ था। 1937 में नेपाल नरेश ने उनको कथा वाचस्पति की उपाधि दी थी। तत्कालीन प्रधानमंत्री व राष्ट्रपति भी उनकी कथा से प्रभावित रहे। अपने जीवनकाल में उन्होंने 150 से अधिक पुस्तकें लिखीं और इतनी ही पुस्तकों का संपादन भी किया।
बीएचयू के लिए दान कर दी थी सालभर की कमाई
महामना मदनमोहन मालवीय जी राधेश्याम कथावाचक के गुरु रहे। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के निर्माण के लिए धन एकत्र करने के क्रम में वह बरेली आए तो पंडित राधेश्याम ने अपनी सालभर की कमाई दान कर मिसाल पेश की थी।
पंडित जी की रचनाएं आज भी प्रासंगिक
निर्देशक एवं लेखक अंबुज कुकरेती ने बताया कि रंगमंच और रामलीलाओं में पंडित जी की रचनाएं आज भी प्रासंगिक हैं। राधेश्याम रामायण और रामलीलाओं के जरिये मर्यादा के किरदार को लोग और आसानी से समझ सके। उन्हीं की रचनाओं को आधार बनाकर हम आगे बढ़ रहे हैं। उत्तराखंड के कलाकार आज भी पंडित जी के लिखे संवादों को उपयोग करते हैं।
संगीत-अकादमी पुरस्कार से सम्मानित लेखक व निर्देशक डॉ. बृजेश्वर सिंह ने कहा कि रुहेलखंड की रामलीलाएं और राधेश्याम रामायण एक-दूसरे के पूरक हैं। हम नए स्वरूप में उसका प्रस्तुतीकरण कर रहे हैं। विंडरमेयर थिएटर की संगीतमयी रामलीला पूरी तरह राधेश्याम रामायण पर ही आधारित है। कुछेक नए प्रयोग व तकनीकी के जरिये इसमें नयापन लाने का प्रयास भी हमारी टीम ने किया है, जिसे दर्शकों का प्यार भी मिल रहा है।