आठ अगस्त को तहरीर, अब तक रिपोर्ट दर्ज नहीं
ग्राम पंचायत अधिकारी नरेश राठौर ने रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए आठ अगस्त को थाना हाफिजगंज में तहरीर दी थी। अब तक रिपोर्ट दर्ज न होने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। इन आरोपों पर थाना प्रभारी ने बताया कि ऐसे मामलों में पुलिस अधीक्षक से आदेश लेना पड़ता है। इसी वजह से रिपोर्ट दर्ज नहीं की जा सकी।
पोर्टल के दुरुपयोग का संदेह
सूत्रों के अनुसार, पंचायत सहायक ने ग्राम पंचायत अधिकारी के आईडी और पासवर्ड का उपयोग किया। पोर्टल ग्राम पंचायत अधिकारी के ओटीपी के बिना नहीं खुलता है। अभिलेख अपलोड होने के बाद तहसील और खंड विकास कार्यालय की रिपोर्ट के बाद ही प्रमाणपत्र जारी होते हैं। इतनी जांच के बावजूद फर्जी प्रमाणपत्र जारी होना गंभीर मामला है। इसमें पंचायत सहायक के साथ अन्य अधिकारियों की भूमिका पर भी संदेह है।
डीपीआरओ कमल किशोर ने बताया कि प्रकरण गंभीर है। इस मामले में जांच कराकर आरोपी पंचायत सहायक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने के साथ उसकी सेवाओं को भी समाप्त किया जाएगा।
नबावगंज में हो चुका तहसीलदार के डिजिटल हस्ताक्षरों का दुरुपयोग
पिछले दिनों नवाबगंज में तहसीलदार के डिजिटल हस्ताक्षरों का दुरुपयोग करते हुए सैकड़ों लोगों को फर्जी आय, जाति और मूल निवास प्रमाणपत्र जारी किए जाने का मामला भी सामने आ चुका है। इस मामले में तहसीलदार दुष्यंत प्रताप सिंह ने नवाबगंज तहसील के पास स्थित जन सेवा केंद्र संचालक नेमचंद्र और उसके साथी विजय के खिलाफ उनके फर्जी डिजिटल हस्ताक्षर से प्रमाणपत्र बनाने के संबंध में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
जांच में सामने आया कि आरोपियों ने दुष्यंत प्रताप सिंह के हस्ताक्षर से उन तारीखों में भी प्रमाणपत्र बना दिए जब उनकी तैनाती नवाबगंज में नहीं थी। दोनों आरोपी फिलहाल जेल में हैं।