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दर्दनाक: सड़क पर पड़ा था खून ही खनू... कहीं पड़े थे जूते तो कहीं किताबें; घटनास्थल पर था भयावह मंजर

Wed, 31 Jan 2024 09:31 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, बरेली

सार

Budaun Road Accident News: बदायूं के उझानी कोतवाली इलाके में मंगलवार सुबह इको वैन की कैंटर से टक्कर हो गई। इसी दौरान पीछे आई रोडवेज बस भी दोनों वाहनों से टकरा गई। हादसे में वैन चालक, उसके मासूम बेटे और एक छात्र की मौत हो गई। छह बच्चे घायल हुए हैं।  
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Road Accident - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बदायूं में बरेली-मथुरा हाईवे पर उझानी क्षेत्र में जुनइया मोड़ के पास मंगलवार सुबह हुए हादसे की असल वजह कोहरे में वैन चालक द्वारा बस को ओवरटेक करना रहा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ओवरटेक के दौरान कैंटर से टकराने के बाद बस पीछे से वैन से भिड़ गई थी। 
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इस हादसे में वैन चालक, उसके बेटे और छात्र-छात्रा की मौत हो गई। पांच बच्चे घायल हो गए। कोतवाली क्षेत्र के गांव जुनइया निवासी उमेश दिवाकर को अपने और पड़ोसी गांव फूलपुर से बच्चों को लेकर समय रहते हाईवे स्थित कैप्टन गजराम सिंह इंटर कॉलेज में पहुंचाना था। 

फूलपुर से तेजपाल मौर्य की बेटी महक, कृतिका, बेटे आलेख, सुरेंद्र की बेटी स्वाति और राधा, निशांत पुत्र छत्रपाल, सरिता पुत्री विक्रम को वैन में बैठाकर उमेश निकला तो उनका डेढ़ साल का मासूम दुष्यंत भी गोद में था। उमेश को लगा कि बच्चों को स्कूल पहुंचाने में लेट हो रहा है तो उसने रोडवेज बस को ओवरटेक किया। 
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उसी दौरान सामने से कैंटर आ गया। कोहरे की वजह से वैन और कैंटर के ड्राइवर एक-दूसरे के वाहनों को नहीं देख पाए। आमने-सामने की भिड़ंत के बाद स्कूल वैन को पीछे से रोडवेज बस ने चपेट में ले लिया। बताते हैं कि स्कूल वैन दोनों वाहनों की बीच फंस गई थी। इसी वजह से मासूम दुष्यंत, उसके पिता उमेश, छात्र आलेख और छात्र स्वाति की जान चली गई। 

आलेख भी अगली सीट पर बैठा था। पीछे बैठे बच्चों के भी काफी चोटें आई हैं। पुलिस ने जुनइया निवासी मृतक उमेश के पिता यशपाल की तहरीर पर कैंटर के अज्ञात ड्राइवर के खिलाफ लापरवाही से वाहन चलाने में रिपोर्ट दर्ज की गई है। प्रभारी निरीक्षक मनोज कुमार सिंह ने बताया कि कैंटर के बारे में डिटेल प्राप्त की जा रही है। कैंटर बदायूं की ओर से कछला की तरफ जा रहा था।

पति समेत मासूम बेटे की मौत से विनीता ने सुधबुध खोई
जुनइया निवासी स्कूल वैन ड्राइवर उमेश दिवाकर और डेढ़ साल के मासूम बेटे दुष्यंत की मौत ने पूरे परिवार को झकझोर दिया है। पत्नी विनीता तो सुधबुध खो बैठी है। चार भाई-बहनों में सबसे बड़े 28 साल के उमेश ने परिवार की रोजी-रोटी के लिए ईको वैन खरीदी थी। भाइयों में योगेश, वीरेश और बहन सविता है। 

 

सभी की शादियां हो चुकी हैं। पिता यशपाल और मां कमला देवी उसी के साथ रहते हैं। विनीता ने पिछले साल कैप्टन गजराज सिंह इंटर कॉलेज में बतौर शिक्षिका कार्य किया था। इसी के चलते उमेश ने कॉलेज में आसपास इलाके के बच्चों को अपनी वैन से पहुंचाना शुरू कर दिया था।

तेजपाल की तीन संतानों में सबसे छोटा था आलेख
बुटला के कैप्टन गजराज सिंह इंटर कॉलेज में कक्षा-एक के छात्र आलेख मौर्य के पिता तेजपाल खेती करते हैं। उनकी तीन संतान में वह सबसे छोटा था। उसकी मौत से परिवार में कोहराम मच गया है। सड़क हादसे के दौरान मृत आलेख से बड़ी दोनों बहनें महक और क़ृतिका भी इसी कॉलेज में पढ़ती हैं। तीनों भाई-बहन एक साथ ही कॉलेज जाने को उमेश की वैन से निकले थे।

पीछे सीट पर बैठे होने की वजह से कृतिका और महक तो लहूलुहान हो गई, लेकिन उन्हीं की आंखों के सामने भाई आलेख की जान चली गई। हादसे की जानकारी होने पर पूरा परिवार राजकीय मेडिकल कॉलेज पहुंच गया। आलेख की मां सावित्री देवी शव देखते ही बिलखने लगीं। पिता तेजपाल भी बदहवास नजर आए। रिश्तेदारों समेत कुनबे के लोग आलेख के माता-पिता का ढांढस बंधाते रहे। 

सड़क पर कहीं पड़े थे जूते तो कहीं किताबें
हादसे के बाद रोडवेज बस और कैंटर के बीच में फंसी स्कूल वैन से बच्चों को आसपास लोगों ने बाहर निकाला। बच्चों के बस्ते और किताबें सड़क पर बिखरीं पड़ी थीं। किसी के जूते-चप्पल वैन तो किसी की किताबें बाहर बिखरी पड़ी थीं। टक्कर के दौरान क्षतिग्रस्त स्कूल वैन के शीशे और अन्य सामान के पास पड़ी किताबों के आसपास खून भी नजर आया।

किताबें खून से सन चुकी थीं। उनके बस्ते भी इधर- उधर बिखरे पड़े मिले। बताते हैं कि घायल बच्चों को वैन से बाहर निकालते समय ही उनके बस्ते बाहर खिंच आए थे। दो-तीन बच्चों के जूते-चप्पल तो वैन में ही रह गए। हादसे की जानकारी होने पर घायल बच्चों के परिजन मौके पर पहुंचे तो हालात देख सहम गए। ग्रामीणों के गुस्से के मद्देनजर रोडवेज बस सवार महिला-पुरुष पैदल ही पैदल ही निकल कर दूर चले गए। वहां से उन्होंने दूसरे वाहन में लिफ्ट ली।

कॉलेज प्रबंधक बोले- अभिभावक ही निजी वाहन से भेजते हैं बच्चे
कैप्टन गजराम सिंह इंटर कॉलेज के प्रबंधक अमरदीप सिंह को जब हादसे के बारे में जानकारी हुई तो वह मौके पर पहुंच गए। काॅलेज और दुर्घटनास्थल के बीच दूरी भी अधिक नहीं है। प्रबंधक ने बताया कि कॉलेज को वर्ष-2018 से इंटर तक की कक्षाओं के संचालन की मान्यता है। कॉलेज में अधिकतर छात्र और छात्राएं निजी वाहनों से आते हैं।
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जुनइया के उमेश दिवाकर ने अपने और फूलपुर गांव के बच्चों को कॉलेज पहुंचाने के लिए उनके अभिभावकों से प्रति बच्चा तीन सौ रुपया महीनादारी पर वाहन का संचालन शुरू कर दिया था। उमेश की वैन को कॉलेज में कांट्रेक्ट पर भी नहीं रखा गया था। अभिभावकों ने ही उसे बच्चों को कॉलेज पहुंचाने और लाने की जिम्मेदारी सौंप रखी थी।
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