अंतरराष्ट्रीय मार्केट में क्रूड आयल के सस्ता होने के कारण सऊदी अरब में काम करने वाली फैक्ट्रियों में मंदी छा गई है। जिसके कारण वहां काम कराने वाली इन कंपनियों ने अपने को समेटने के साथ-साथ मजदूरों की भी छंटनी शुरू कर दी है। अधिकांश मजदूर निकाल दिए गए हैं। जो मजदूर वहां हैं, उनसे महीने भर में एक सप्ताह से लेकर 15-15 दिन तक काम लिया जा रहा है।
ठिरिया कस्बा और आसपास के गांवों के करीब सवा सौ लोग तो पहले ही वहां का माहौल भांपकर बरेली आ गए थे। अभी भी यहां के करीब 400 लोग वहां फंसे हुए हैं, जिनको महीने में कुछ समय के लिए काम मिल रहा है। बाकी के दिनों में मजबूरी वश वह लोग खाली हाथ रहते हैं। मंदी के कारण सऊदी अरब की बिन लादेन कंपनी बंद कर दी गई। उसी के साथ सभी कर्मचारियों को निकाल दिया और उनको घरों पर वापस जाने की सलाह दी। इस फैक्ट्री में काम करने वाले 100 कर्मचारी ठिरिया के ही थे। इलेक्ट्रीशियन का काम करने वाले शब्बीर का कहना है कि वहां पर सात महीने काम किया लेकिन एक महीने का वेतन देकर नौकरी से निकाल दिया। इसी तरह गुफरान का कहना है कि उन्होंने वहां पर चार महीना काम किया और दो महीने का वेतन देकर भारत लौटने की सलाह दी। ऐसा ही ठिरिया के वाहिद खां के साथ हुआ।
आजाद वीजा पर जाते हैं सऊदी अरब
सऊदी अरब में काम करने वाले लोग आजाद वीजा पर जाते है लेकिन अब वह काम के अभाव में परेशान हैं। सऊदी अरब पहुंचते ही कंपनियां इन लोगों से पासपोर्ट ले लेती हैं और उनको अपनी मर्जी से भारत वापस भेजती हैं। ऐसे में कई कंपनियां बंद हो गई लेकिन उनकी ओर से पासपोर्ट दिए ही नहीं गए हैं, जो कि अपने पासपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं।