पीलीभीत। डॉक्टरों पर लग रहे आरोप और कानूनी कार्रवाई के विरोध में आईएमए ने सामूहिक अवकाश का निर्णय लिया है। सोमवार को एसोसिएशन की बैठक के बाद उसे जुड़े डॉक्टरों ने अपने चैंबर बंद कर दिए।
ईएनटी सर्जन डॉ.एसके मित्रा पर दो दिन पूर्व थाना सुनगढ़ी में कोर्ट के आदेश पर गैर इरादतन हत्या की रिपोर्ट दर्ज की गई है। इसमें उन पर पांच साल के मासूम का गलत ऑपरेशन करने का आरोप लगा था, जिससे मासूम की मौत होना बताया गया। कुछ माह पूर्व गौहनिया चौराहा के पास एक प्राइवेट अस्पताल में लाश का इलाज करने के नाम पर एक लाख रुपये ऐंठे गए थे। इस मामले में फर्जी डिग्री के आधार पर अस्पताल संचालित करने की बात आई थी, जिसमें डॉक्टर पर एफआईआर हुई और अस्पताल सील कर दिया था। इसके अलावा भी डॉक्टरों पर कई आरोप लगे। इन सब कार्रवाइयों से क्षुब्ध होकर आईएमए (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) ने सोमवार को बैठक की, जिसमें सर्व सम्मति से अवकाश पर जो का निर्णय लिया गया। डॉक्टरों का कहना है उनका मानसिक उत्पीड़न किया जा रहा है। उन्होंने पढ़ाई इसलिए नहीं कि वह हत्यारे बने। गलत धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज करने की भी बात कही।
आजकल डॉक्टरों के बीच अत्यंत भय का माहौल बन चुका है। सभी डॉक्टरों में इतना मानसिक अवसाद उत्पन्न हो गया है कि कोई भी मरीज सामान्य रूप से देख नहीं पा रहे हैं। ऐसे में हम अपने प्रोफेशन एवं मरीज के साथ न्याय नहीं कर पा रहे। मानसिक अवसाद के बीच में हमने अवकाश पर जाने का निर्णय किया है। हम जनता के बीच बार-बार हत्यारे के रूप में चर्चित न हों, ऐसे में अब जनता को उच्च स्तरीय डॉक्टर के पास जाने का मौका मिलेगा, जिससे उनका बेहतर इलाज संभव हो सकेगा।
- डॉ. तरुण सेठी, आईएमए अध्यक्ष