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फेसबुक पर छह महीने की चुप्पी बता रही अवसाद की कहानी

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अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के छात्र अनस शम्सी के फांसी के फंदे से लटककर जान देने के बाद हर कोई उसकी मौत की वजह की तलाश कर रहा है। 20 फरवरी को फेसबुक पर फंदे में मछली का चित्र पोस्ट करना फिर उसके बाद कोई भी पोस्ट सामने न आने से उसके दोस्त अंदाजा लगा रहे हैं कि इसके बाद वह अवसाद से उबर नहीं पाया।
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ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि जब अनस ने कार्टून बनाया होगा तो कोई न कोई बात तो उसके दिमाग में रही होगी। यह बात उसने परिवारवालों से भी नहीं शेयर की। फिलहाल अभी अनस की सुसाइड की गुत्थी पूरी तरह से सुलझी नहीं है। इधर परिवार इस बात से सहमत नहीं है कि अनस अवसाद में था। पिता का कहना है कि हाल ही में छुट्टियां बिताने अनस घर आया था। यहां वह 10 दिन तक सामान्य तरीके से रहा। अब उसके निजी जीवन में कोई दिक्कत हो तो वह उनको पता नहीं। माता-पिता यह समझने की कोशिश में लगे हैं कि अपने कैरियर के प्रति चिंतित रने वाले अनस ने खुदकुशी करने की क्यों सोची।
कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला पकड़िया निवासी जनरल मर्चेंट व्यापारी समीउद्दीन शम्सी के तीन बच्चों में सबसे छोटा अनस पांच साल से अलीगढ़ में रहकर एमएसडब्ल्यू पढ़ाई के बाद पीएचडी की तैयारी कर रहा था। उसने दो दिन पूर्व हॉस्टल के कमरे में फंदा लगाकर जान दे दी थी। अनस का शव सुपुर्द ए खाक किया जा चुका है। परिजन अपने होनहार जवान बेटे को खोकर टूट चुके हैं। हर कोई अनस के जान देने के पीछे वजह का पता लगाने के लिए अपने-अपने स्तर से कयास लगा रहा है, मगर अब तक जान देने की वजह स्पष्ट नहीं हो सकी है।
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दिल्ली चला जाता तो शायद टल जाता हादसा
पिता समीउद्दीन शम्सी और अन्य रिश्तेदारों का कहना है कि उसने कभी अपनी दिक्कत का अहसास ही नहीं होने दिया। वह ऐसा कदम उठाएगा, ये उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था। न तो उसे पढ़ाई की दिक्कत थी, न नौकरी की। अनस अभी आगे की पढ़ाई और नौकरी की तैयारी के सिलसिले में दिल्ली जाने की बात कह रहा था। कुछ दोस्तों का कहना है कि शायद वह यहां से हट जाता तो यह घटना न होती।
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