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क्रूरता: बंदरों को बोरी में भरकर ले गए अधिकारी, डेढ़ घंटे तक घुटता रहा दम

Sun, 24 Nov 2019 10:27 PM IST
बरेली ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बरेली
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बंदरों को पकड़कर ले जाते कर्मचारी - फोटो : अमर उजाला
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पीलीभीत में लंबे समय से उत्पात मचा रहे बंदरों को पकड़ने के लिए रविवार को नगर पंचायत की ओर से भेजे गए अधिकारियों का जानवरों के प्रति व्यवहार देखकर वहां मौजूद लोग हैरान रह गए। बंदरों को पकड़ने आए लोगों ने जिस क्रूरता के साथ उन्हें काबू में किया उसे देखकर लोगों की आंखें भर आईं। 

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अधिकारियों ने बंदरों को पकड़कर पहले बोरियों में बंद कर दिया और फिर बोरी को बांध दिया। इसके बाद 50 किलोमीटर दूर ले जाकर उन्हें घुंघचाई इलाके में खन्नौत नदी के पास छोड़ा दिया गया। करीब डेढ़ घंटे तक बंद बोरी में बंदरों का दम घुटता रहा। सोशल मीडिया में यह मामला उछलने पर नगर पंचायत और वन विभाग के अफसरों ने कहा कि क्रूरता नहीं बरती गई है।

बता दें कि नगर पंचायत गुलड़िया भिंड़ारा (मझोला) में बंदरों का आतंक है। बंदर कई लोगों को घायल कर चुके हैं। समस्या गंभीर होने पर नगर पंचायत के अधिकारियों की ओर से बंदरों को पकड़वाने के लिए वन विभाग को कहा गया तो उन्हें पकड़ने की अनुमति मिल गई। रविवार को बंदरों को पकड़ने के लिए नगर पंचायत के कर्मचारी जुटे। वन विभाग के भी कुछ कर्मचारी साथ थे। 
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गन्ना सोसायटी परिसर में बंदरों को पकड़ने का काम शुरू हुआ। बंदरों के आते ही उन्हें जाल बिछाकर कैद में कर लिया। पकड़े गए 20 बंदरों को कर्मचारियों ने बुरी तरह से बोरी में बंद कर दिया और गाड़ी में डाल दिया। बंदर बोरी के भीतर सांस भी नहीं ले पा रहे थे। उन्हें 50 किमी की दूरी पर पूरनपुर तहसील क्षेत्र के घुंघचाई इलाके में खन्नौत नदी के पास छुड़वा दिया गया। 

विभाग का कहना है कि बंदरों को छोड़ने से पहले उनका मेडिकल परीक्षण भी कराया गया। पकड़े गए सभी 20 बंदर स्वस्थ निकले। उत्पाती बंदरों को पकड़वाने के लिए नगर पंचायत गुलड़िया भिंडारा की ओर से अनुमति मांगी गई थी। इस पर 20 बंदरों को पकड़कर मेडिकल परीक्षण के बाद सुरक्षित स्थान पर छोड़ा गया है। किसी तरह की क्रूरता नहीं बरती गई है। 

टाइगर रिजर्व एसडीओ उमेश चंद्र राय ने कहा कि बंदर आपस में न लड़ें, इसलिए उन्हें बोरी में बंद किया गया था। रेंजर सतेंद्र कुमार ने कहा कि बंदरों को पकड़ने के बाद जाल में ले जाना ज्यादा उचित है। हालांकि अगर बंदरों को बोरी में ले जाए जाने पर किसी बंदर की मौत हो जाती है तो संबंधित कर्मचारी के खिलाफ वन्यजीव अधिनियम के तहत कार्रवाई का प्रावधान है।

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