पिछले तीन माह में कराए गए सर्वे बता रहे हैं कि बरेली की हवा में हानिकारक गैसों की मात्रा डेढ़ गुनी तक बढ़ोत्तरी हुई है। ये जहरीली होती हवा मनुष्य ही नहीं पशु पक्षियों के स्वास्थ्य के लिए भी खतरनाक है। पेट्रोल-डीजल से चलने वाले वाहनों और जनरेटरों से निकलने वाले धुएं से बरेली की हवा जहरीली होती जा रही है। हरियाली की कमी और रोजाना बढ़ते धुएं के प्रदूषण से हवा में हानिकारक गैसें तय मानक से ज्यादा मात्रा में घुल रही हैं । अगर यही हाल रहा तो आगामी 10 साल के अंदर सांस, दमा, चर्मरोग, डायरिया के मरीजों की संख्या में तीन से चार गुना तक इजाफा हो सकता है।
शहर में बेतहाशा बढ़ रही बाइक, कार, ट्रक, आटो आदि वाहनों की संख्या और जनरेटरों से निकलने वाले धुएं से हवा प्रतिदिन जहरीली होती जा रही है। इसमें बड़े और छोटे सूक्ष्म कणों की संख्या निर्धारित मानक 200 माइक्रोग्राम मीटर क्यूबिक से कहीं ज्यादा है। यही नहीं धुएं से हवा को प्रदूषित बनाने वाली गैसों में सल्फर डाईआक्साइड, नाइट्रोजन, आक्सीजन, ओजोन और लेड निर्धारित मात्रा (10 माइक्रोग्राम मीटर क्यूबिक) से दो गुने से भी ज्यादा है जो कि स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। वाहनों और जनरेटर के धुएं का प्रदूषण बढ़ने से हर माह आंखों में जलन, सांस, दमा, उल्टी, दस्त, डायरिया और चर्म रोगियों की संख्या में लगातार बढ़ोत्तरी रही है।
वायु प्रदूषण से ये बीमारियां फैल रही हैं
1- आरएसपीएम (बड़े सूक्ष्म कण)- सांस लेने में तकलीफ
2- एसपीएम- (बारीक सूक्ष्म कण)- फेफड़े में खराबी
3- सल्फर डाईआक्साइड- आंखों में जलन, रोशनी कम होना
4- नाइट्रोजन आक्साइड-हवा से आक्सीजन लेने की क्षमता कम होना, उल्टी, दस्त, चिड़चिड़ापन, दम घुटना, पेट की बीमारियां
5-ओजोन- चर्म रोग होना, स्किन खराबी
6- लेड- खून को जहरीला बनाना
डीजल और पेट्रोल से निकलने वाला लेड खून को जहरीला बनाता है।
हवा में हानिकारक गैसों की मात्रा (माइक्रोग्राम मीटर क्यूबिक में)
नाम वर्तमान मात्रा (अप्रैल) निर्धारित मानक
आरएसपीएम 229 200
एसपीएम 301 200
सल्फरडाईआक्साइड 13.34 10
नाइट्रोजन आक्साइड - 22.01 10
ओजोन 36.0 80
लेड .085 1.0
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ऐसे कम हो सकता है वायु प्रदूषण
बरेली कालेज बरेली में बाटनी विभाग के सेवानिवृत्त प्रो. डीके सक्सेना के मुताबिक डीजल पेट्रोल से चलने वाले वाहनों का कम इस्तेमाल,जनरेटर का प्रयोग कम करने,सीएनजी से चलने वाले वाहनों का प्रयोग और घर, दफ्तर, विश्वविद्यालय, अस्पताल या अन्य सार्वजनिक स्थानों पर सोलर पैनल लगवाकर प्रदूषण कम किया जा सकता है।
पंजीकृत वाहनों की संख्या
स्कूटर-38273, मोपेड -3362, बाइक-324025, कार-27180, जीप-3609, ओमनी-13, ट्रैक्टर-41155, ऑटो-4572, टेंपो-2340, ई रिक्शा-785 ट्रक व लॉरी-3795 हल्के भार वाहन-7021 बस-860, मोटर कैब-1723, मैक्सी कैब-482
(ये वाहन आरटीओ में पंजीकृत हैं। अवैध वाहनाें की गिनती ही नहीं है।)