दूधियों की कारगुजारी है और एफएसडीए की अनदेखी, दूध की मांग कितनी भी बढ़ जाए उसकी कमी कभी नहीं रहती। मोटे अनुमान के मुताबिक गर्मियों के दौरान हरे चारे की कमी से दूध का रोज का उत्पादन औसतन 25 हजार लीटर से ज्यादा घट गया है, लेकिन इसकी भरपाई सिंथेटिक दूध से की जा रही है। शहर ही नहीं देहात के तमाम इलाकों से लाकर सिंथेटिक दूध यहां बेचा जा रहा है।
शहर में रोज दूध की औसत सप्लाई लगभग डेढ़ लाख लीटर है। गर्मी में दूध की खपत बढ़ने से डिमांड 25 हजार लीटर तक बढ़ जाती है। अनुमान के मुताबिक इन दिनों मांग के सापेक्ष दूध का उत्पादन 60 हजार लीटर तक कम है। इसकी भरपाई मिलावट और सिंथेटिक दूध से ही की जा रही है। दुग्ध संघ के जिलाध्यक्ष लल्लू सिंह बताते हैं गर्मी में दूध की मांग बढ़ने के बाद शहर की डेयरियों के अलावा आंवला, बिनावर, धनेरा, तिरकुनियां, मीरगंज, धनेटा फाटक, सीबीगंज, बिथरी चैनपुर, फरीदपुर के आसपास के गांवों और तिलहर से सिंथेटिक दूध बड़ी मात्रा में बरेली लाया जा रहा है। इसमें एफएसडीए की भी मिलीभगत है।
इन्फो
ये है शहर में दूध की खपत
15 हजार लीटर पराग डेयरी, मदर डेयरी और अन्य डेयरियों से
55 हजार लीटर शहर की 403 निजी डेयरियों से
20 हजार लीटर दूध दूधियों के माध्यम से