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23 साल बाद ताऊ ने माना भतीजा

Wed, 13 May 2015 02:16 AM IST
बरेली
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 करोड़ों के वारिस साफ्टवेयर इंजीनियर अंबर निगम को आखिर 23 साल बाद इंसाफ मिल ही गया। उसे ताऊ कमल मोहन निगम एडवोकेट ने कुछ संभ्रात व्यक्ति के बीच बैठकर समझौता करके अंबर को अपना भतीजा मान ही लिया। अब तक तो वह अपना खून ही मानने से इनकार कर रहे थे। बहन प्रियंका निगम ने भी भाई से हंसी-खुशी मुलाकात की।
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कॉरपोरेशन बैंक में नौकरी करने वाले दिलीप निगम की पत्नी रेनू ने 12 जून 1989 को अंबर को जन्म दिया था। 29 मई 1991 को रेनू की बेटी प्रियंका को जन्म देते समय मौत हो गई थी। बच्चों की परवरिश की चिंता हुई तो दिलीप ने बेटे को बड़ी बहन मधुबाला निगम को सौंप दिया था। जबकि बेटी प्रियंका की देखभाल के लिए नौकरानी रख दी थी। इसी बीच दिलीप निगम की मौत हो गई थी। इसके बाद हालात बदल गए। उन्होंने नौकरानी को निकालकर प्रियंका को अपने पास रख लिया था। रामपुर बाग की कोठी और दिलीप निगम की अंबर के नाम की एफडीआर बगैरह सब कमल मोहन निगम के पास ही थीं। इसके बाद कई मुकदमे लिखे गए। कमल मोहन निगम अंबर को अपना भतीजा ही मानने को तैयार नहीं थे। परेशान होकर अंबर ने अपने हिस्से की कोठी को डिप्टी सीएमओ को बेच दी। इसके बाद कमल मोहन निगम और उनके भतीजे में फिर से कानूनी जंग तेज हो गई। उन्होंने डीआईजी के निर्देश पर अंबर, डिप्टी सीएमओ अपने बहनोई आदि के खिलाफ मुकदमा लिखा दिया। लेकिन सच्चाई का पता लगने पर पुलिस ने मुकदमा खत्म कर दिया। बाद में अंबर निगम की तरफ से कोतवाली पुलिस ने कमल मोहन निगम और उनके बेटे के खिलाफ मुकदमा लिख लिया गया। अंबर ने डीएम गौरव दयाल से मिलकर ताऊ से अपनी एफडीआर दिलाने की गुहार की तो उन्होंने मामले को संज्ञान में ले लिया। डीएम के सख्त रुख पर कमल मोहन निगम ने अंबर से बात करके कुछ प्रोफेसर होरीलाल शर्मा, जगमोहन पुरी, पूर्णिमा कपूर आदि को बैठाकर समझौता कर लिया। उन्होंने कोठी का आधे हिस्से में से आधा अंबर और आधा उसकी बहन को दे दिया। अंबर ने बताया कि उसे ताऊ और बहन से कोई शिकायत नहीं है। उसे उसका हक मिल गया। एफडीआर भी ताऊ ने देने को कह दिया है।   

 
इंसेट----
इंसाफ के लिए अंबर ने गांधीगीरी की थी
-अंबर निगम ने इंसाफ पाने के लिए कि सी अफसर का दरबार नहीं छोड़ा। उसने कलेक्ट्रेट में डीएम के ऑफिस के सामने। कचहरी परिसर में, आईजी, डीआईजी और एसएसपी के यहां भी झाड़ू लगाई थी। लेकिन इंसाफ नहीं मिल पाया था। अब तेईस बाद ताऊ ने उसे अपना खून माना तो खुशी से झूम गया। जबकि बचपन से ही उसके पास दिलीप निगम का बेटा होने के सारे सुबूत थे।   
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