सड़क के किनारे मनमाने तरीके से लगने वाली दुकानों, ठेलों और खोमचों को व्यवस्थित करने के लिए नगर निगम बोर्ड ने दो साल पहले शहर में फेरी नीति लागू करने का प्रस्ताव स्वीकृत किया था। नगर निगम ने लखनऊ की संस्था युग एसोसिएट्स से 90 रुपये प्रति वेंडर के खर्च पर अनुबंध किया। संस्था ने अपने सर्वे में पांच हजार वेंडर चिह्नित किए। रजिस्ट्रेशन में फर्जीवाड़े पर मामला बिगड़ा तो काम रोकने के आदेश दिए गए। पांच महीने से फेरी नीति पर सर्वे का काम बंद है। संस्था ने अपनी सिक्योरिटी मनी वापस मांगी है। मतलब, शहर दो साल पहले जहां से चला था, वहीं अब भी खड़ा है।
सड़क के किनारे लगने वाले फड़, ठेले और खोमचे अतिक्रमण और जाम की बड़ी वजह हैं। केंद्र सरकार ने इनको व्यवस्थित तरीके से व्यवसाय करने के लिए 2009 में फेरी नीति लागू की थी। 2013 में नगर निगम बोर्ड से प्रस्ताव स्वीकृत होने के बाद तत्कालीन अपर नगर आयुक्त सच्चिदानंद सिंह ने लखनऊ की संस्था युग एसोसिएट्स से अनुबंध किया। संस्था ने 90 रुपये प्रति वेंडर पर फेरी लगाने वाले दुकानदारों को चिह्नित कर उनकी वीडियोग्राफी की। संस्था ने सर्वे में पांच हजार वेंडर चिह्नित किए।
प्रथम चरण में 1407 वेंडरों को बसाने के लिए 15 वेंडर जोन निश्चित किए गए। ये वेंडर जोन मुख्य चौराहों से 20 मीटर की दूरी से प्रारंभ होने थे, जिससे यातायात की समस्या न आए। वेंडर जोन में फूड वेंडर जोन अलग से बनने थे। दो साल बाद फेरी नीति का काम आधे-अधूरे सर्वे तक सीमित होकर रह गया। नगर निगम से कोई निर्णय न होने की स्थिति में संस्था ने पांच महीने से सर्वे का काम बंद कर रखा है। इसके साथ ही नगर निगम में जमा 25 हजार की सिक्योरिटी मनी भी वापस मांगी है। इससे फेरी नीति लागू होने का मामला अधर में लटक गया है।
फेरी नीति में संस्था को करने थे ये काम
1- वेंडरों की आन स्पॉट वीडियोग्राफी
2- प्रत्येक वेंडर का बायोमेट्रिक सर्वे
3- प्रत्येक वेंडर का सर्वे के बाद रजिस्ट्रेशन करना
4- वेंडिंग और नान वेंडिंग जोन का निर्धारण करना
5- कैटेगरी निर्धारण के बाद वेंडरों को आई कार्ड जारी करना
6- वेंडर जोन का स्वयं सहायता समूह बनाकर बैंक से कम ब्याज पर लोन दिलाना
वर्जन
‘मुझे हाल ही में चार्ज मिला है। अभी फेरी नीति की फाइल देखी नहीं है। काम आगे बढ़ाने के लिए संस्था से बात की जाएगी।’ - ईश शक्ति कुमार सिंह, प्रभारी अपर नगर आयुक्त।
15 महीने में फेरी नीति पर कोई बैठक नहीं हुई। हमें एक भी पैसे का पेमेंट नहीं मिला। तीन लाख के पेमेंट को घटाकर डेढ़ लाख कर दिया गया। नगर निगम में सब बड़ी-बड़ी बातें करते हैं। काम कोई नहीं करना चाहता। अगर फेरी नीति सही से लागू हो जाती तो कम से कम एक लाख रुपये रोजाना का राजस्व बढ़ता, जिससे शहर का विकास होता। - विनोद शर्मा, हेड, युग एसोसिएट्स संस्था।
इस बारे में संस्था से बात हुई है। एक या दो दिन में संस्था प्रमुख को बुलाया गया है। जो दिक्कतें हैं, उनको दूर कराकर फेरी नीति पर काम आगे बढ़ाया जाएगा। - डॉ. आईएस तोमर, मेयर।