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दबंग के डर से मुंह खोलने से घबरा रही बिन ब्याही मां

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फरीदपुर। बिन ब्याही मां दबंग के डर से आरोपी का नाम बताने में घबरा रही है। सूत्रों के मुताबिक आरोपी उसी के गांव के एक दबंग का बेटा है, जिसने उसके साथ दुष्कर्म किया था। लड़की का परिवार दूसरे स्थान से आकर गांव में बसा है। आरोपी कौन है यह लड़की के घरवाले भी भलीभांति जानते हैं, लेकिन वह इसके बाद दूसरी मुसीबत में नहीं पड़ना चाहते। उन्हें डर है कि अगर उन्होंने आरोपी को नाम सार्वजनिक किया तो उनके साथ कोई भी अप्रिय घटना हो सकती है। सोमवार को 11 बजे किशोरी और बच्ची को सीएचसी से सीडब्ल्यूसी कार्यालय भेजा जाएगा। जहां बोर्ड उसके बयान दर्ज कर आगे की कार्रवाई करेगा।
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सीएचसी फरीदपुर में गुरुवार रात करीब दो बजे एक किशोरी को उसका पिता एंबुलेंस से लाया था। पिता ने उसे पेट दर्द होने की बात कही थी। डॉक्टरों ने जब जांच की तो गर्भवती होने की बात पता चली थी। इसके बाद डॉक्टरों ने किशोरी का प्रसव कराया। उसने एक बच्ची को जन्म दिया था। इससे बाद किशोरी और उसके पिता ने बच्ची को अपनाने से मना कर दिया था और चुपचाप अस्पताल से जाने लगे थे तो स्टाफ ने रोक लिया था। इसके बाद भूख से बिलखती बच्ची को स्टाफ ने दूध पिलाने की गुजारिश की थी तो उसने साफ इनकार कर दिया था। यहां तक की वह बच्ची को अपने पास आने तक नहीं दे रही थी। शनिवार को स्वास्थ्य कर्मियों की काउंसलिंग के बाद उसे बच्ची को दूध पिलाना शुरू किया।
सोमवार को सीडब्ल्यूसी की टीम के सामने दोनों को पेश किया जाएगा। इससे पहले टीम ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि इससे पहले मां और बच्ची को अस्पताल से डिस्चार्ज न किया जाए। हालांकि अभी भी आशंका बनी हुई है कि कहीं किशोरी बच्ची को छोड़कर निकल न जाए इसलिए कर्मचारियों की ड्यूटी लगा दी गई है। वे दिन रात मां-बेटी की निगरानी कर रहे हैं। वहीं बच्ची को गोद लेने के लिए फरीदपुर के अलावा बरेली, पीलीभीत, बीसलपुर, बदायूं आदि के लोगों के लगातार फोन आ रहे है। सीएचसी अधीक्षक ने स्पष्ट रूप से उन्हें बता दिया कि सीडब्ल्यूसी ही इस संबंध में कोई निर्णय ले सकता है।
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दो दिन में स्टाफ की लाड़ली हुई बच्ची
2 दिन से बच्ची की देखभाल सीएचसी कर्मचारी कर रहे हैं। बच्ची बहुत सुंदर भी हैं। इस कारण का लगाव उससे हो गया है। गुड़िया की तरह स्टाफ उसको खूब खिला भी रहा है। इतना ही नहीं डॉक्टर भी जाकर बच्चे को देख रहे हैं और काफी समय उस बच्ची के साथ खेल कर अपने घर जा रहे हैं।

बच्ची को गोद लेने वालों के फोन आ रहे हैं। व्यक्तिगत रूप से भी लोग संपर्क कर रहे हैं, लेकिन उनको बता दिया गया है कि सीडब्ल्यूसी कार्यालय ही इस पर कोई निर्णय करेगा। वहीं जाकर प्रार्थना पत्र दें। मां-बेटी की देखभाल के लिए कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। - डॉ. बासित अली, अधीक्षक सीएचसी फरीदपुर।
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