बरेली। कुछ दिन पहले आंवला में एक मंत्री के रिश्तेदार की शस्त्र दुकान पर एक बंदूक को वापस लेने वाले लाइसेंसी के रजिस्टर पर साइन तो करा लिए गए थे लेकिन उसे जारी करने की तारीख का हवाला नहीं दिया गया। इस फर्जीवाड़े को लेकर प्रशासन अब इस दुकान को निरस्त करने की कार्रवाई कर रहा है। इसके बाद यह संभावना जाहिर की जा रही है कि जिले की दूसरी शस्त्र दुकानों पर कहीं ऐसा फर्जीवाड़ा तो नहीं हो रहा, इसके लिए सिटी मजिस्ट्रेट सभी एसीएम और एसडीएम को इसकी जांच के आदेश दे दिए हैं।
आंवला के पुरैना के रहने वाले सत्यप्रकाश पर वर्ष 2012 में बवाल का मुकदमा दर्ज हुआ था। पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर प्रशासन ने उनका लाइसेंस निरस्त कर दिया। सत्यप्रकाश इसके खिलाफ कमिश्नर कोर्ट में चले गए। इस केस की जांच के दौरान सिटी मजिस्ट्रेट मदन कुमार कोे पता चला कि सत्यप्रकाश ने आंवला में सात जून, 2012 को राजपूत गन हाउस में शस्त्र जमा किया था। शस्त्र विक्रेता के रजिस्टर पर जमा की तारीख थी लेकिन निकासी वाले कॉलम में डेट के बजाय केवल शस्त्रधारक के साइन थे। इस मामले में तो विक्रेता के खिलाफ कार्रवाई चल रही है, लेकिन इससे यह संकेत भी मिले हैं कि ऐसा फर्जीवाड़ा जिले की दूसरी शस्त्र दुकानों पर भी हो रहा है। इससे अपराध करने वाले शस्त्रधारकों को अनुचित लाभ मिलने का मौका मिल सकता है। सिटी मजिस्ट्रेट का कहना है कि ऐसे गंभीर मामलों को पकड़ने और इसमें विक्रेताओं की भूमिका की जांच जरूरी है। इसलिए सभी एसीएम और एसडीएम को जांच अधिकारी बनाते हुए रिपोर्ट मांगी गई है।