बरेली। कमिश्नर रणवीर प्रसाद बृहस्पतिवार को रुहेलखंड विश्वविद्यालय इंजीनियरिंग के छात्रों को आईएएस की तैयारी के टिप्स देने पहुंचे थे। मगर इंजीनियरिंग के छात्र अपने विषय से संबंधित समान्य सवालों का जवाब ही नहीं दे सके। इस पर कमिश्नर ने उन्हें समझाया कि पढ़ाई कोई मैगी नहीं, जो दो मिनट में तैयार हो जाए, लंबे परिश्रम की जरूरत होती है।
रुहेलखंड विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन स्थित सभागार में आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्ष कुलपति प्रो. अनिल शुक्ला ने की। कमिश्नर ने छात्रों को बताया जब उन्होंने जेई क्वालीफाई किया था और वह आईआईटी में काउंसलिंग को पहुंचे तो बच्चा समझकर उन्हें घुसने नहीं दिया था। उस समय उनकी उम्र 16 साल तीन माह थी। कहा, जो भी करें रुचि से करें। बताया कि अगर हाईस्कूल तक पढ़ाई मन से की है तो समझो जनरल स्टडी (जीएस) की आधी पढ़ाई हो गई। छात्रों से सवाल किया कितनों ने संविधान, उसकी प्रस्तावना, संसद का गठन, मूल अधिकार के बारे में पढ़ा है तो बहुत कम छात्रों ने हाथ उठाए। इस पर उन्होंने आज के यूथ को दो मिनट की मैगी चाहिए लेकिन पढ़ाई ऐसे नहीं होती। छात्रों से पूछा कि प्रिंसिपल ऑफ नेचुरल जस्टिस पूछा तो लॉ के छात्र ने जवाब दिया। छात्रों से कहा कि आपका विषय इंजीनियरिंग है लेकिन कूप मंडूक (कुआं का मेढक) न बनें। आईएएस के लिए पर्यावरण और समाज के बारे में भी पढ़ना जरूरी है। हर विषय पर ज्ञान की जरूरत है और पढ़ाई को दो घंटे से बढ़ाकर 18 घंटे तक ले जाना होता है। फिर साफ्टवेयर इंजीनियरिंग के छात्रों से सवाल किया, क्वेर्टी और स्विफ्ट क्या होता है, कोई भी जवाब नहीं दे सकता तो कमिश्नर ने बताया कि ये एंड्रायड पर टाइपिंग में प्रयोग होता है। बोले- आईएएस में ऐसे ही सामान्य सवाल पूछे जाते हैं। व्यक्तित्व निखारने के भी टिप्स दिए। इस दौरान डीन इंजीनियरिंग प्रो. एसके पांडेय, प्रो. रविंद्र सिंह, प्रो. संजय कुमार, डॉ. अमित सिंह, प्रो. पीबी सिंह आदि मौजूद रहे।