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रजिस्ट्री विभाग के अभिलेखों में खुर्द-बुर्द कर अपने नाम दर्ज कराई 15 बीघा जमीन

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बरेली। रजिस्ट्री विभाग के रिकार्ड रूम में करीब 15 बीघा जमीन के अभिलेखों में खुर्द-बुर्द करके मूल प्रविष्टि मिटाकर फर्जी बैनामा करने का मामला सामने आया है। यह मामला उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान तक पहुंचने के बाद एसपी विजिलेंस ने इसकी रिपोर्ट डीएम को भेज दी है। अब प्रशासन अपने स्तर से इस मामले की पड़ताल कर कार्रवाई तय करेगा। इससे पहले नवाबगंज में 100 बीघा जमीन को लेकर भी इसी तरफ का फर्जीबाड़ा सामने आ चुका है। इसमें भी कलक्ट्रेट के रिकार्ड रूम में खतौनियों को खुरचकर उसमें फर्जी इंद्राज दर्ज कर दी गई थी।
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विजिलेंस के पास यह मामला पहुंचा है कि किला मुंतिसिल चाहचिड़ीमारान के मुशीर हुसैन खां, शाहिर, मोहम्मद अख्तर सहित कई लोगों ने आंवला तहसील के ग्राम गुलड़िया उपराला में करीब अपनी पंद्रह बीघा जमीन का बैनामा वर्ष 1993 में नत्थूलाल, जयदेवी, कुंदन देवी, चोखेलाल, बृजलाल, गोपाल बिहारी व तेजराम के नाम किया था। दोनों ही पक्षों ने इसकी बिक्री के कागज भी रजिस्ट्री विभाग के आंवला दफ्तर में जमा कर दिए थे।
आरोप है कि कुछ लोगों ने जुलाई 1970 में जालसाजी और धोखाधड़ी करके इस जमीन पर वास्तविक विक्रेताओं की जगह अपने नाम फर्जी बैनामा के आधार पर दर्ज करा दिया। हालांकि बाद में मामला खुलने के बाद खुद चकबंदी अधिकारी ने इसे निरस्त कर दिया था। वर्ष 2017 में भी उपनिबंधक आंवला ने तलाश प्रमाण पत्र में बताया कि वर्ष 1960 से 1971 तक इस जमीन का कोई विक्रय नहीं किया गया है। बावजूद इसके वर्ष 1998 में फर्जीबाड़ा कर इस जमीन को फिर से दूसरे लोगों के नाम दर्ज कर दिया गया है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इसमें कई कद्दावर नेताओं की शह में प्रशासन के अधिकारियों ने यह पूरा खेल रचा है। वर्ष 2017 में यह मामला सामने आया तो वर्ष 1993 में खरीददारों ने मुख्यमंत्री के यहां शिकायत की। बावजूद इसके रजिस्ट्री विभाग से लेकर प्रशासन तक के अधिकारी इस पर कोई एक्शन नहीं ले रहे। मामला शासन तक पहुंचने के बाद विजिलेंस ने इस मामले की रिपेार्ट डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह को भेज दी है।
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यह प्रकरण अभी उनके संज्ञान में नहीं आया है। अगर ऐसी गड़बड़ी हुई है तो उसके रिकार्ड चेक कराकर सच्चाई को उजागर किया जाएगा।
-बीसी सिंह, एआईजी स्टांप
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