बदायूं। 20 जुलाई को जगत ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय में शिक्षकों में हुई मारपीट के बाद में बीएसए ने एक शिक्षक को तीसरे दिन निलंबित कर दिया, उसके निलंबन का आदेश अगले दिन ही पहुंच गया। जांच के उपरांत पाया गया कि दूसरा शिक्षक भी दोषी है। इस आधार पर बीएसए ने तीन अगस्त को दूसरे आरोपी शिक्षक को भी निलंबित कर दिया, लेकिन तीन अगस्त से आज तक आरोपी शिक्षक के निलंबन का पत्र 20 किलोमीटर की दूरी नहीं तय कर पाया है, जिसके चलते बेसिक शिक्षा अधिकारी का आदेश हवा में लटक गया है।
जिले में बेसिक शिक्षा का हाल बेहाल है। यहां पर जिस किसी पर विभागीय अधिकारियों की मेहरबानी हो जाए, तो कोई भी उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकता है। ऐसा ही एक वाकया उच्च प्राथमिक विद्यालय जगत का है, जहां पर दो शिक्षकों के आपसी विवाद में एक बच्चे को मोहरा बनाया गया। उस बच्चे के परिजनों ने दिव्यांग शिक्षक ज्ञान सिंह पर मारपीट का आरोप लगाया। इस पर बीएसए ने प्रथम दृष्टया दिव्यांग शिक्षक को आरोपी मानते हुए 26 जुलाई को निलंबित कर दिया। इसके बाद में 27 जुलाई को स्कूल में निलंबन का आदेश भी पहुंच गया। जांच पूरी होने के उपरांत बीएसए को जानकारी हुई कि मारपीट वाले मामले में शिक्षक मुकेश कुमार सारस्वत भी आरोपी थे। ऐसे में बीएसए ने दो अगस्त को उनको भी निलंबित कर दिया, लेकिन विभागीय अधिकारियों की मेहरबानी कहें या कुछ और, जिसकी वजह से निलंबन का आदेश आज तक विद्यालय नहीं पहुंच सका है।
एक शिक्षक पर इतनी मेहरबानी क्यों
-उच्च प्राथमिक विद्यालय में तैनात एक शिक्षक पर विभाग की मेहरबानी की वजह लोगों की समझ से परे नजर आ रही है। क्योंकि बीएसए की ओर से जिस दिव्यांग शिक्षक को निलंबित किया गया है। उसे बीआरसी सहसवान में अटैच किया, जिसका लेटर दूसरे ही दिन विद्यालय पहुंच गया। वहीं दूसरा शिक्षक जिसके निलंबन होने के सात दिनों बाद भी लेटर नहीं पहुंचा, साथ ही उसे पड़ोस के बीआरसी केंद्र से अटैच किया गया है, जो अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठा रहा है।
बीएसए कार्यालय की ओर से अभी तक ऐसा कोई भी लेटर हमें प्राप्त नहीं हुआ है। इस वजह से शिक्षक वहीं पर तैनात है। जब निलंबन को आदेश प्राप्त होगा, तो उन्हें वहां से हटा दिया जाएगा।
-जगदीश प्रसाद, बीईओ