सामाजिक संगठन का भी लिया जा रहा सहयोग
काउंसलर नेहा ने बताया कि नशे के आदी लोगों को केंद्र तक लाने के लिए सामाजिक संगठन चेतना का सहयोग लिया जा रहा है। अब तक करीब 100 से ज्यादा लोगों को संस्था के लोग इलाज के लिए लेकर आए हैं। काउंसलिंग और जांच के बाद पांच लोग इजेक्शन से नशा लेने की पुष्टि हुई। जो समूह बनाकर एक ही इंजेक्शन से आपस में नशा करते थे। इससे उनमें गंभीर रोग होने की भी आशंका होती है।
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एचआईवी, हेपेटाइटिस बी, क्षय रोग समेत कई बीमारियां हो सकती हैं। उन्हें इस नशे से होने वाले संभावित खतरे, जीवन संकट, परिवार की स्थिति, आर्थिक नुकसान, सामाजिक उपेक्षा और जीवन यापन में तकलीफ के बारे में बताया जाता है। ताकि उनकी इच्छाशक्ति मजबूत हो और नशा छोड़ने को आगे आएं।
दवाएं पूरी तरह सुरक्षित, नहीं होता कोई साइड इफेक्ट
सीनेट के स्टाफ नर्स संजीव ने बताया कि काउंसलिंग सेंटर में जो भी दवा दी जाती है। वह पूरी तरह सुरक्षित और मानकों पर खरी है। इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं होता। अब तक जिन मरीजों को दवा दी गई उन पर कोई दुष्प्रभाव भी नहीं हुआ। इलाज पूरी तरह निःशुल्क होता है।
एक रुपये के पर्चे पर नशे से आजादी दिलाने का प्रयास सेंटर में किया जा रहा है। सप्ताहभर में भी तमाम लोग पहुंचे हैं और लक्षण और गंभीरता का आकलन कर उचित दवाएं दी गईं। एडी एसआईसी डॉ अलका शर्मा ने ऐसे लोग जो इंजेक्शन से नशा करते हैं, उन्हें केंद्र तक लाने की अपील लोगों से की है ताकि वे नशे के चंगुल से मुक्त हो सकें।