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UP: इंजेक्शन के नशे में जकड़े युवाओं को आजाद कराएगा ओएसटी सेंटर, बरेली में स्वास्थ्य विभाग ने शुरू की पहल

Tue, 22 Jul 2025 06:53 PM IST
मुकेश कुमार अजीत प्रताप सिंह, अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

सार

Bareilly News: बरेली के जिला अस्पताल में ओएसटी (ओपियड सब्टीट्यूशन थेरेपी) सेंटर की स्थापना की गई है। यहां पर नशा करने के लती लोगों का निशुल्क उपचार किया जाएगा। अब तक यहां पांच लोगों को उपचार के लिए लाया गया है। 
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ओएसटी सेंटर पर मौजूद काउंसलर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बरेली में इंजेक्शन से नशा कर रगों में जहर घोल रहे लोगों को इस लत से आजादी दिलाने के लिए जिला अस्पताल में ओपिएड सब्सियल्ट्यूशनल थेरेपी सेंटर का संचालन शुरू हुआ है। सप्ताह भर में यहां पांच लोगों को इलाज के लिए लाया गया, जो नशे के आदी है। जिसमें से दो का नियमित इलाज और काउंसलिंग जारी है।

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सेंटर प्रभारी डॉ आशीष कुमार के मुताबिक नशाग्रस्त मरीजों के परिजनों को इनके इलाज के लिए वाराणसी, लखनऊ सहित प्रदेश के बड़े शहरों में जाकर उपचार कराने के झंझट से मुक्ति मिलेगी। साथ ही, परिवार के ऐसे सदस्य जो गलत संगत में नशा की लत से अपनी सेहत और सूरत बिगाड़ चुके हैं। उनके समुचित उपचार की उम्मीद जगी है। 

स्टाफ को किया गया प्रशिक्षित 
उन्होंने बताया कि युवाओं में नशाखोरी की बढ़ती प्रवृति को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने इस दिशा में पहल शुरू कर दी। इसी कड़ी में नशा की लत छुड़ाने के लिए विशेषज्ञों के साथ स्टाफ नर्स को प्रशिक्षित किया गया। जिला अस्पताल में ओएसटी (ओपियड सब्टीट्यूशन थेरेपी) सेंटर की स्थापना की गई है। इस सेंटर पर न सिर्फ नशाग्रस्त मरीजों का जांच होगा, बल्कि दवा भी दी जायेगी, जिससे नशा के लत की शिकार मरीजों की लत धीरे-धीरे छूट सकेगी। 
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जिले में ड्रग्स सहित कई तक जानलेवा नशा की चपेट में आए लोगों की संख्या अधिक है। लिहाजा स्वास्थ्य विभाग ने योजनाबद्ध तरीके से उपचार करेगा। ओएसटी विशेषज्ञों द्वारा पीड़ितों का नशा धीरे-धीरे छुड़वा का भरोसा भी परिजनों को दिया जा रहा है। हालांकि अभी उपचार का क्रम ही शुरू हो सका है।

सामाजिक संगठन का भी लिया जा रहा सहयोग
काउंसलर नेहा ने बताया कि नशे के आदी लोगों को केंद्र तक लाने के लिए सामाजिक संगठन चेतना का सहयोग लिया जा रहा है। अब तक करीब 100 से ज्यादा लोगों को संस्था के लोग इलाज के लिए लेकर आए हैं। काउंसलिंग और जांच के बाद पांच लोग इजेक्शन से नशा लेने की पुष्टि हुई। जो समूह बनाकर एक ही इंजेक्शन से आपस में नशा करते थे। इससे उनमें गंभीर रोग होने की भी आशंका होती है। 

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एचआईवी, हेपेटाइटिस बी, क्षय रोग समेत कई बीमारियां हो सकती हैं। उन्हें इस नशे से होने वाले संभावित खतरे, जीवन संकट, परिवार की स्थिति, आर्थिक नुकसान, सामाजिक उपेक्षा और जीवन यापन में तकलीफ के बारे में बताया जाता है। ताकि उनकी इच्छाशक्ति मजबूत हो और नशा छोड़ने को आगे आएं।
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दवाएं पूरी तरह सुरक्षित, नहीं होता कोई साइड इफेक्ट 
सीनेट के स्टाफ नर्स संजीव ने बताया कि काउंसलिंग सेंटर में जो भी दवा दी जाती है। वह पूरी तरह सुरक्षित और मानकों पर खरी है। इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं होता। अब तक जिन मरीजों को दवा दी गई उन पर कोई दुष्प्रभाव भी नहीं हुआ। इलाज पूरी तरह निःशुल्क होता है। 

एक रुपये के पर्चे पर नशे से आजादी दिलाने का प्रयास सेंटर में किया जा रहा है। सप्ताहभर में भी तमाम लोग पहुंचे हैं और लक्षण और गंभीरता का आकलन कर उचित दवाएं दी गईं। एडी एसआईसी डॉ अलका शर्मा ने ऐसे लोग जो इंजेक्शन से नशा करते हैं, उन्हें केंद्र तक लाने की अपील लोगों से की है ताकि वे नशे के चंगुल से मुक्त हो सकें।

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