बरेली। स्वास्थ्य विभाग के औषधि भंडार और जिला अस्पताल के स्टोर में दवाएं भरी हैं, लेकिन जिला अस्पताल के डॉक्टर बाहर की दवा लिखने से बाज नहीं आ रहे। शुक्रवार को कई मरीजों को डॉक्टरों ने साल्ट, ब्रांडेड दवा का नाम लिखकर पर्ची थमा दी। किसी ने दवा खरीदी तो कोई बगैर लिए घर चला गया।
स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष ने किसी भी सरकारी अस्पताल के डॉक्टर द्वारा बाहर की दवा लिखने पर उनके खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की चेतावनी दी है। अमर उजाला ने शुक्रवार को जिला अस्पताल की पड़ताल की तो यहां उल्टी गंगा बहती नजर आई। दोपहर 12 बजे से एक बजे तक आठ से दस मरीज जिला अस्पताल का पर्चा लेकर निजी मेडिकल स्टोर से दवा खरीदने पहुंचे।
अस्पताल के बाहर के निजी मेडिकल स्टोर के पास पुराना शहर निवासी कामरान खड़े थे। बताया कि डॉक्टर ने खुजली की ट्यूब और कुछ दवा बाहर से लेने के लिए कहा है। वह दवा लिखने वाले डॉक्टर का नाम नहीं बता सके। मेडिकल स्टोर वाले ने ट्यूब की कीमत सौ रुपये बताई तो वह दवा लिए बिना ही लौट गए।
सख्ती के बावजूद नहीं थमा खेल : बताते हैं कि कोरोना महामारी से पहले अस्पताल के बाहर पांच निजी मेडिकल स्टोर थे। डॉक्टरों के पास मेडिकल प्रतिनिधि पहुंचते थे। ड्रग स्टोर में दवा खत्म होने की बात कहकर मरीजों को बाहर भेजा जाता था। मामला सुर्खियां बना और सख्ती बढ़ी तो बाहर की दवा लिखने का सिलसिला कम हुआ पर खेल पूरी तरह थमा नहीं। मुनाफा घटने पर तीन निजी मेडिकल स्टोर बंद हुए। दो मेडिकल स्टोर अस्पताल के बाहर दाएं-बाएं तरफ चल रहे हैं।
इसके साथ ही, परिसर में कुत्तों का आतंक दिखा। वे वार्डों में भी घूमते नजर आए। ब्यूरो