बरेली। अनफिट और अनधिकृत वाहनों से विद्यार्थियों को स्कूल-कॉलेज ले आने और घर पहुंचाने का काम किया जा रहा है। निजी वाहनों का इस्तेमाल भी स्कूल वाहनों के रूप में किया जा रहा है। इनमें सबसे ज्यादा संख्या वैन की है। इनमें ऐसी वैन भी हैं जो पेट्रोल के स्थान पर सीएनजी से दौड़ाई जा रही हैं। जिले में केबल 941 स्कूल वाहन पंजीकृत हैं, लेकिन सड़कों पर दो हजार से ज्यादा स्कूल वाहन दौड़ रहे हैं।
जुलाई में स्कूल खुलने के बाद परिवहन विभाग ने जिले में चेकिंग अभियान शुरू किया है। तीन दिन में 67 अनधिकृत स्कूल वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है। बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग के रिकाॅर्ड के अनुसार जिले में सीबीएसई के 78 और यूपी बोर्ड के 427 स्कूल हैं। इसके अलावा 200 से ज्यादा कॉन्वेंट, प्ले स्कूल और काफी संख्या में निजी हायर एजुकेशनल इंस्टीट्यूट भी हैं। इनमें से 29 संस्थान ही स्कूल वाहनों का इस्तेमाल करते हैं।
परिवहन विभाग के रिकाॅर्ड के मुताबिक जिले में 941 स्कूल वाहन पंजीकृत हैं। पिछले वर्ष यह संख्या 881 थी। विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट ने स्कूल वाहनों को लेकर गाइडलाइन भी जारी की है, पर स्कूल संचालक और निजी वाहनों के स्वामी इसकी भी अनदेखी कर रहे हैं।
स्पीड कंट्रोलर डिवाइस व सीसीटीवी कैमरे नदारद
गाइडलाइन के मुताबिक स्कूल वाहनों में स्पीड कंट्रोलर डिवाइस होनी चाहिए। इनकी अधिकतम गति सीमा भी 40 किसी प्रति घंटे निर्धारित की गई है। स्कूल वाहनों में सीसीटीवी कैमरे भी लगे होने चाहिए, लेकिन जिन वैनों का इस्तेमाल स्कूल वाहनों के रूप में किया जा रहा है, वे इन मानकों को पूरा नहीं करतीं।
यह हैं मानक
वाहनों का पंजीकरण, फिटनेस, प्रदूषण प्रमाण पत्र, चालक का ड्राइविंग लाइसेंस और पुलिस वेरीफिकेशन, वाहन पर मोबाइल नंबर, पुलिस हेल्पलाइन नंबर दर्ज होने चाहिए। वाहन पीले रंग का होना चाहिए। खिड़कियों के दोनों ओर सुरक्षा के लिहाज से फेंसिंग होनी चाहिए। अग्निशमन यंत्र, जीपीएस, सीसीटीवी कैमरे एवं स्पीड कंट्रोलर डिवाइस होनी चाहिए। वाहन पर स्कूल का नाम पर स्पष्ट लिखा होना चाहिए।
वर्जन
अनधिकृत स्कूल वाहनों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। स्कूलों में जाकर वाहनों का सत्यापन भी कराया जा रहा है। चारों जिलों के एआरटीओ को निर्देश दिए हैं कि किसी भी दशा में अनधिकृत स्कूल वाहनों का संचालन न होने पाए। - दिनेश कुमार सिंह, आरटीओ प्रवर्तन