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नजारत के रिकॉर्ड में मिली एक करोड़ रुपये की गड़बड़ी

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बरेली कलक्ट्रेट। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
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कलक्ट्रेट की दुकानों के किराए का मामला

वर्ष 2006 से दुकानों का किराया वसूलने की जांच में पुष्टि
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कमिश्नर ने दिया नायब नाजिर कैश को निलंबित करने का आदेश

बरेली। नजारत के रिकॉर्ड में एक करोड़ रुपये का हिसाब गड़बड़ होने की पुष्टि हुई है। कलक्ट्रेट की 84 दुकानों का वर्ष 2007 में हाईकोर्ट में मामला निस्तारित होने के बावजूद किराया वसूली और उसमें बढ़ोत्तरी न करके सरकार को क्षति पहुंचाने की भी तस्दीक हो गई है। कमिश्नर के आदेश पर इस मामले में फंसे नायब नाजिर कैश शिवेश गुप्ता को डीएम ने निलंबित करने की कार्रवाई शुरू कर दी है।
नजारत में काफी समय से सरकारी रकम को लेकर हेराफेरी हो रही थी। कमिश्नर रणवीर प्रसाद ने 26 फरवरी को कलक्ट्रेट के निरीक्षण के दौरान यह फर्जीवाड़ा पकड़ा था। कमिश्नर ने जब नायब नाजिर शिवेश गुप्ता से नजारत की अलमारी खुलवाकर रिकॉर्ड देखा तो दंग रह गए। उसमें रखे कटे चेकों का कैशबुक से मिलान ही नहीं हुआ। इसके अलावा अन्य मदों से प्राप्त धनराशि की भी कैशबुक में इंट्री नहीं थी। कमिश्नर ने बैंक की पासबुक चेक की तो उसमें एक करोड़ से अधिक की धनराशि तो शेष थी, लेकिन रिकॉर्ड में उसका कोई ब्योरा नहीं मिला था। कमिश्नर ने इस मामले में प्रभारी अधिकारी नजारत से कैश बुक की तीन वर्षों की प्रविष्टियों का रिकॉर्ड मंगवाकर चेक किया तो उसमें भी गड़बड़ी सामने आई। पत्रावली की नोटिंग पर नायब नाजिर कैश/ नाजिर प्रशासनिक अधिकारी ने हस्ताक्षर तो किए थे लेकिन उनका पास बुक से मिलान नहीं किया था। बाद में चीफ ट्रेजरी आफीसर के सहयोग से रिकॉर्ड ठीक कराने की कार्रवाई शुरू की गई।
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इसके अलावा कलक्ट्रेट की 84 दुकानों की किराया वसूली और उसमें बढ़ोत्तरी को लेकर भी नजारत की बड़ी घपलेबाजी सामने आई है। कमिश्नर को जांच में मिला कि वर्ष 2007 में हाईकोर्ट में मामला निस्तारित होने के बावजूद वर्ष 2006 से अब तक तैनात रहे नायब नाजिर ने न तो किराए की वसूली की है और न ही उसमें बढ़ोत्तरी की। इस हेराफेरी से शासन को जबरदस्त नुकसान पहुंचा है। कमिश्नर ने इस मामले में नायब नाजिर शिवेश गुप्ता को निलंबित करने के आदेश डीएम को दिए हैं। इस पर डीएम ने निलंबन की कार्रवाई शुरू कर दी है।

अक्षर विहार की भूमि वापस ली जाएगी, बाबू और अधिकारियों पर गिरेगी गाज

कमिश्नर ने 26 फरवरी को नजूल अनुभाग की सिविल लाइंस में अक्षर विहार की जमीन को तत्कालीन एडीएम (वित्त) का अनुमोदन लिए बगैर ही फ्रीहोल्ड कर उसका बैनामा कराने के मामले में भी सख्त रुख अपनाया है। कमिश्नर के आदेश पर तत्कालीन नजूल सहायक शेरपाल सिंह के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई है। कमिश्नर ने इस भूमि को वापस लेने के निर्देश देने के साथ ही इस मामले में शामिल तत्कालीन अधिकारी और कर्मचारियों पर कार्रवाई के निर्देश डीएम को दिए हैं।

फरीदपुर में रोडवेज स्टैंड के लिए जमीन अधिग्रहण के मामले में फंसा बाबू

कमिश्नर ने कलक्ट्रेट के निरीक्षण में फरीदपुर में जमीन अधिग्रहण के मामले में भी घपला पकड़ा था। फरीदपुर में रोडवेज बस अड्डे के निर्माण के लिए 4100 वर्गमीटर भूमि का अधिग्रहण होना था। इसके लिए धनराशि भी प्राप्त हो चुकी है। न्यायालय में मामला निस्तारित हो जाने के बावजूद पटल सहायक अनिल कुमार ने समय से कार्रवाई नहीं की। इसके अलावा हवाई अड्डा की भूमि अधिग्रहण के मामले में भी पटल सहायक अनिल कुमार और विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी मदन कुमार सही जवाब नहीं दे सके थे। कमिश्नर ने जांच आख्या में डीएम को पटल सहायक के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश डीएम को दिए हैं।
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