दूसरे सोमवार को शिवालयों में ज्यादा भीड़ रहेगी क्याेंकि इस सोमवार को दो सौ वर्ष बाद दुर्लभ संयोग बन रहा है। इस दिन चतुर्दशी, त्रयोदशी और अमावस्या स्पर्श करेगी। इन तीनों तिथियों के स्पर्श होने से त्रिस्पर्श योग बन रहा है।
पंचांग के अनुसार पहली अगस्त को पड़ने वाले सोमवार को व्रत और रूद्राभिषेक करने से सिद्धि और चमत्कारिक फल की प्राप्ति होती है। आचार्य मुकेश मिश्रा ने बताया कि इस सोमवार को पुनर्वसु नक्षत्र भी है जो कि सभी नक्षत्रों में बलिष्ठ है। इस दिन सूर्य, चंद्रमा भी कर्क राशि में एकसाथ रहेंगे जो यश, वैभव, शांति, उन्नति और ज्ञान का प्रतीक है। ऐसा ही संयोग दो सौ साल बाद बन रहा है।
- ऐसे करें पूजा
शिवलिंग पर चावल चढ़ाने से धन वृद्धि, काले तिल चढ़ाने से पाप का नाश, पितृ तृप्ति, जौं से सुख, गेहूं से संतान में वृद्धि होती है। शिव पुराण के अनुसार जलधारा से बुखार से शांति, सुख में वृद्धि और तेज दिमाग के लिए शक्कर मिश्रित दूध को चढ़ाएं। लाल व सफेद फूल, चमेली के फूल, अलसी के फूल, बेला, जूही, कनेर, हरसिंगार, धतूरा, बेलपत्र, भांग आदि शिव को प्रिय है।