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बेटों ने देना बंद किया खाना-पानी तो बूढ़ी अम्मा ने नहर में लगाई छलांग, भावुक कर देगी मां की कहानी

Thu, 11 Jul 2019 08:55 AM IST
शाहरुख खान न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पीलीभीत
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सांकेतिक तस्वीर
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पीलीभीत के बिलसंडा में पांच बेटे और हिस्से में जमीन होने के बाद भी बुजुर्ग को बुढ़ापे में सहारा नहीं मिल रहा। आए दिन उसे भूखा रखा जाता। इससे आहत होकर उसने अपनी जान देने की ठान ली और मकसूदापुर नहर में छलांग लगाने पहुंच गई। 
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उसे छलांग लगाते देख पास खड़े लोगों ने देख लिया तो दौड़कर बचा लिया। सूचना मिलने पर पुलिस पहुंची तो बुजुर्ग ने अपना दुखड़ा सुनाया। इसे सुनकर हर कोई भावुक हो गया। पुलिस ने बेटों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी, लेकिन कोई घर पर नहीं मिला। 

बाद में एक बेटा पत्नी संग थाने पहुंचा और मां के भरण पोषण का जिम्मा उठाने की बात कही। इस पर पुलिस ने बुजुर्ग को उसके सुपुर्द कर दिया। बिलसंडा थाना क्षेत्र के गांव रूरिया घुरिया निवासी बुंदा देवी (75) बुधवार सुबह कस्बा बिलसंडा से बस में सवार होकर बंडा (शाहजहांपुर) स्थित मकसूदापुर बड़ी नहर के पास पहुंच गई। 
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नहर किनारे पहुंचने के बाद वृद्धा कुछ देर खड़ी रही और फिर छलांग लगा दी। कुछ दूरी पर मौजूद राहगीरों ने उन्हें देखा तो दौड़कर निकाल लिया। सड़क किनारे बैठाया और उनके बारे में जानकारी की। सूचना मिलने पर बंडा और बिलसंडा दोनों थानों की पुलिस मौके पर पहुंच गई। इसके बाद बुजुर्ग को बिलसंडा पुलिस अपने साथ थाने ले आई। 
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बुजुर्ग ने अपना दुखड़ा सुनाया कि उनके छह बेटों में से एक की मौत हो चुकी है। पति भी अब इस दुनिया में नहीं हैं। बाकी के पांच बेटों ने तीन साल पहले बंटवारा कर दिया। इस दौरान तय किया गया कि उनके हिस्से की एक बीघा जमीन जो भी बेटा जोतेगा, वही उनका भरण पोषण करेगा। 

खानपान की व्यवस्था भी उसी की जिम्मे रहेगी। आरोप है कि कुछ दिन सब सही चलता रहा लेकिन बाद में उनको परेशान किया जाने लगा। इसी से तंग आकर वह खुदकुशी करने के लिए आई थीं। पुलिस ने पूरी बात सुनने के बाद दबिश दी, लेकिन कोई नहीं मिला। 

इंस्पेक्टर अतर सिंह ने बताया कि कुछ देर बाद ही बुजुर्ग का तीसरे नंबर का पुत्र राममूर्ति अपनी पत्नी संग थाने आया। यहां उसने मां का भरण पोषण करने की जिम्मेदारी संभालने का भरोसा दिलाया है। इस पर बुजुर्ग को उसी के सुपुर्दगी में दे दिया है।
 
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