बंदरों को भगाने के लिए खरीदी गई एयरगन का पेमेंट कृषि विभाग में मुद्दा बन गई है। बिना किसी वित्तीय स्वीकृति और बजट के उप कृषि निदेशक (कृषि रक्षा) ने एयरगन खरीद तो ली, लेकिन अब उसके भुगतान के लिए लंबे समय से पत्राचार चल रहा है। अब इस मामले में जिलाधिकारी से भी एयरगन का भुगतान कराने की फरियाद की गई है।
उप कृषि निदेशक (कृषि रक्षा) अशोक कुमार यादव ने चार महीने पहले विभाग की बिलवा स्थित आईपीएम प्रयोगशाला में बंदरों के उत्पात से सुरक्षा करने के नाम पर एक एयरगन खरीद डाली और इसका 7705 रुपये का बिल उप कृषि निदेशक कार्यालय को भुगतान के लिए भेज दिया। चार महीने से यह भुगतान लटका पड़ा है। उप कृषि निदेशक कार्यालय से पहले तो यह कहते हुए एयरगन का भुगतान करने से इंकार कर दिया गया कि नियमानुसार बगैर लाइसेंस के एयरगन रखना अवैध है, लिहाजा इसका भुगतान नहीं किया जा सकता। इस पर उप कृषि निदेशक (कृषि रक्षा) कार्यालय से कलेक्ट्रेट स्थित शस्त्र कार्यालय से इस संबंध में जानकारी ली गई। जब यह साफ हो गया कि एयरगन के लिए लाइसेंस की जरूरत नहीं है तो अशोक कुमार ने यादव ने अब उप कृषि निदेशक को फिर पत्र लिखा है। एयरगन के भुगतान को लेकर चल रहा पत्राचार इन दिनों कृषि विभाग में चर्चा का विषय बना हुआ है। बताया जाता है कि एयरगन खरीदने के लिए किसी तरह की वित्तीय स्वीकृति नहीं ली गई थी, न यह बताया गया था कि इसका कौन इस्तेमाल करेगा। एयरगन से बंदर कैसे भागेंगे, इसका भी कोई ख्याल नहीं रखा।
उप कृषि निदेशक (कृषि रक्षा) ने एक बार फिर अफसरों को लिखा है कि बंदरों को भगाने के लिए खरीद गई एयरगन का भुगतान अतिशीघ्र कराया जाए। उन्होंने पत्र की प्रतिलिपि जिलाधिकारी को भेजी है और उनसे भुगतान कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने की फरियाद की है।