साइबर हमलों और ईमेल के जरिए गोपनीय दस्तावेज लीक न होने पाएं इसलिए सेना ने सभी यूनिट के आफिशियल कंप्यूटरों पर इंटरनेट का प्रयोग प्रतिबंधित कर दिया है। सुरक्षा कारणों से सेना ने यह कदम उठाया है। बरेली स्थित उत्तर भारत एरिया मुख्यालय की सभी यूनिटों में इसका कड़ाई से पालन किया जा रहा है। पठानकोट एयरबेस पर हमले और ऐसी ही कुछ अन्य घटनाओं के बाद सेना ने रक्षा मंत्रालय के फरमान पर यह व्यवस्था लागू की है। इंटरनेट के जरिए कंप्यूटरों पर साइबर हमलों का डर रहता है। साइबर हमलावर इंटरनेट के जरिए कंप्यूटरों से डाटा लीक कर सकते हैं। चूंकि सेना के कंप्यूटरों से गोपनीय कार्य होते हैं इसलिए उसके लीक होने पर सुरक्षा से जुड़े मसलों पर संकट खड़ा हो सकता है, इसको ध्यान में रखकर सेना ने यह सतर्कता बरती है। बरेली के सैन्य क्षेत्र में घुसपैठ करके अहम खुफिया सूचनाएं जुटाने वाला आईएसआई एजेंट इजाज कुछ महीने पहले पकड़ा गया था। इसके बारे में खुलासा हुआ कि उसने कई दस्तावेज जुटा लिए थे। इसके बाद से सेना हर प्रकार से सतर्कता बरत रही है। इंटरनेट प्रयोग होने पर कंप्यूटरों में न सिर्फ साइबर हमले की आशंका रहती है बल्कि उसके जरिए कोई भी ईमेल से गोपनीय दस्तावेज लीक भी कर सकता है इसलिए भी यह कदम उठाया गया है। हालांकि इस निर्णय को सेना के अफसर आंतरिक मामला होने की वजह से कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं लेकिन सेना इस फरमान को लागू कर चुकी है। बता दें कि हाल ही में सेना ने व्हाट्सएप ग्रुप बनाने और सोशल मीडिया के प्रयोग पर भी सावधानी बरती है।