बरेली। तीन माह में नगर निगम के अफसर एक्सईएन से जलौनी लकड़ियों के कोटेशन से संबंधित 28 फाइलें नहीं निकलवा सके। इसको लेकर कई बार कर्मचारियों के बयान दर्ज हो चुके हैं, पर नतीजा कुछ नहीं निकला। अभी तक सिर्फ जांच चल रही है। इस संबंध में आईजीआरएस पर की गई शिकायतों पर अधिकारी निस्तारण की फर्जी रिपोर्ट लगा रहे हैं। इसको लेकर मंडलायुक्त ने भी नाराजगी जताई है।
कुर्मांचलनगर निवासी अमित कुमार अग्रवाल ने बीते साल नगर निगम के निर्माण विभाग के तत्कालीन एक्सईएन दिलीप कुमार शुक्ला पर रिश्वत मांगने, मांग पूरी नहीं होने पर भुगतान नहीं करने जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। कोटेशन की 28 फाइलें गायब होने का मामला भी उठाया था। काफी समय से इसकी जांच चल रही है। तत्कालीन नगर आयुक्त निधि गुप्ता वत्स के समय में भी जेई, लिपिक व अन्य कर्मचारियों ने लिखित बयान दिए थे। इसमें बताया था कि एक्सईएन फाइलें गाड़ी में रखवा लेते थे और अपने आवास पर रखते थे। जलौनी लकड़ी की फाइल भी उन्हीं को दी गई थी।
इसको लेकर आईजीआरएस पर दोबारा शिकायत की गई तो अब मंडलायुक्त ने जांच का निर्देश दिया है। इसमें कहा है कि पत्रावलियां लौटाने के लिए दिलीप कुमार शुक्ला को पत्र भेजने मात्र से शिकायत का निस्तारण नहीं हो जाता। बार-बार पोर्टल पर अंतरिम निस्तारण आख्या प्रेषित करना उचित नहीं है। इससे पोर्टल सी-श्रेणी में जा सकता है और मंडल में बरेली की रैंकिंग भी गिर सकती है। मंडलायुक्त के आदेश पर मंगलवार को बाबू व जेई के बयान लिए हैं। लखनऊ में होने की वजह से एई मुकेश शाक्य के बयान दर्ज नहीं हो सके।
यह है मामला
वर्ष 2023-24 में 40-40 क्विंटल लकड़ी की आपूर्ति के लिए नगर निगम की ओर से वर्कऑर्डर जारी किया था। ठेकेदार अमित कुमार ने 15 जनवरी तक लकड़ियों की आपूर्ति की थी। अमित के मुताबिक, एक रात एक्सईएन टाल पर आए और बाद में भुगतान का आश्वासन देकर लकड़ियों की आपूर्ति चालू रखने के लिए कहा। इस पर उन्होंने तीन फरवरी तक लकड़ियों की आपूर्ति की। एई और जेई ने अतिरिक्त लकड़ियों के कोटेशन की फाइलें और बिल बनाकर उन्हें दिया। इसके बाद फाइल पास करने के लिए एक्सईएन ने मोटी रकम मांगी। मुख्य अभियंता के छुट्टी होने की वजह से उस समय एक्सईएन दिलीप शुक्ला ने खुद पर लगे आरोपों की जांच कर मामले को निस्तारित कर दिया था। मामला खुला तो उन्हें लखनऊ कार्यालय से अटैच कर दिया गया। संवाद
फाइलों को लेकर पत्र जारी किए जा चुुके हैं, जांच चल रही है। अब बड़ा कदम उठाया जाएगा। नगर निगम की संपत्ति को कोई खुर्द-बुर्द नहीं कर सकता है। - मनीष अवस्थी, मुख्य अभियंता, नगर निगम