जोन तीन और चार के लिए एक ही प्रभारी, कब और कहां मिलेंगे? जनता को नहीं होती जानकारी, 36 वार्डों की पांच लाख से अधिक आबादी को हो रही दिक्कत
बरेली। सेवाओं को आमजन के द्वार तक ले जाने की मंशा से बनाए गए नगर निगम के जोनल कार्यालय बेमतलब साबित हो रहे हैं। यहां अधिकारियों के मिलने का समय तय नहीं है। फरियादी आकर लौट जाते हैं। व्यवस्था की भूलभुलैया में फरियादें भटकती रहती हैं। बृहस्पतिवार को पड़ताल में यह हकीकत सामने आई।
नगर निगम के जोन एक से 21, दो से 23, तीन से 21 और चार से 15 वार्ड संबद्ध हैं। जोन एक और दो के कार्य नगर निगम मुख्यालय से होते हैं। जोन तीन का सुरेश शर्मा नगर और जोन चार का कार्यालय प्रेमनगर में है। दोनों जोन से 36 वार्ड जुड़े हैं। जोनल कार्यालयों पूरी तरह से प्रभावी न होने से यहां की पांच लाख से अधिक आबादी परेशान हो रही है। पार्षद नगर निगम बैठक में इस मुद्दे को उठा चुके हैं। ब्यूरो
सुबह 10:15 बजे
जोन : चार (प्रेमनगर)
प्रभारी और कर अधीक्षक के कक्ष मिले बंद
जोनल प्रभारी राजवीर सिंह, कर अधीक्षक मुन्नाराम के कक्ष बंद मिले। राजस्व निरीक्षकों के कक्ष भी खाली पड़े थे। कुछ ही देर में राजस्व निरीक्षक विवेक वर्मा आए और बोले वह फील्ड में थेे। इसके बाद दूसरे राजस्व निरीक्षक सच्चिदानंद सिंह पहुंचे। उन्होंने बताया कि सुबह आठ बजे से वह अतिक्रमण हटवाने के लिए निकले थे। 10 बजे से नगर आयुक्त कार्यालय में बैठक थी, जिसमें जोनल प्रभारी भी थे।
दोपहर 12:30 बजे
जोन : तीन (सुरेश शर्मा नगर)
सफाई निरीक्षक की कुर्सी मिली खाली
कर अधीक्षक रामसेवक राम लोगों की समस्याएं सुनते मिले, लेकिन सफाई निरीक्षक विवेक कुमार की कुर्सी खाली पड़ी थी। उनसे मिलने आए सुरेश शर्मा नगर के विनीत कुमार ने कहा कि वे काफी देर से बैठे हैं। वहां मौजूद महिलाकर्मी ने बताया कि साहब सुबह आए थे और लोगों से मिले भी थे, लेकिन बाद में कहीं जाना पड़ गया।
दिव्यांगों के लिए रैंप तक नहीं
जोन तीन में दिव्यांगों के लिए रैंप तक नहीं है। इसके कर्मचारी और करदाता दोनों परेशान होते हैं। एक कक्ष को कबाड़खाना बना दिया है। यहां कर जमा करने के लिए एक काउंटर भी बना है, लेकिन सुबह दस से 11 बजे के बीच वह खाली मिला।
लंबित हैं कई मामले
जोन तीन के कार्यालय में गणेशपुरम के सौरभ गुप्ता, राकेश गुप्ता और हरूनगला की ज्योति गुप्ता के नामांतरण संबंधी मामले चार माह से लंबित हैं। अप्रैल में इनकी प्रक्रिया पूरी हो गई थी, लेकिन अब तक न तो नामांतरण हुआ, न ही रोके जाने की वजह बताई गई। इन लोगों ने पार्षद से शिकायत की है।
दौड़ती रहती हैं फाइलें, समय पर नहीं होते काम
जोन तीन के कार्यालय और मुख्य कार्यालय के बीच फाइलें दौड़ती रहती हैं। समय पर काम नहीं होते। मैंने नगर निगम की बैठक में जोनल व्यवस्था समाप्त कर नगर निगम मुख्यालय से सभी के काम कराने का प्रस्ताव रखा है। - छंगामल मौर्य, पार्षद
जोन चार के कार्यालय से जुड़े वार्डों के लोगों को व्यवस्था का लाभ नहीं मिलता, क्योंकि वहां अधिकारियों के मिलने का समय तय नहीं है। जब भी जाओ तो यही बताते हैं कि अधिकारी फील्ड में हैं। कब मिलेंगे? यह नहीं बताते। - नवल किशोर, पार्षद
वर्जन
मेरे पास दो जोन का कार्यभार है। अब दोनों जोन के लिए दिन तय करेंगे, ताकि लोगों को लाभ मिल सके। - राजवीर सिंह, कर निर्धारण अधिकारी एवं जोनल प्रभारी