बरेली। कुतुबखाना सब्जी मंडी के 18 फड़ व सात दुकानों को वर्ष 2022 में अवैध बताकर सीज कर दिया गया था। अब उन्हें वैध बताकर खोल दिया गया। इस मामले में पार्षद कपिलकांत ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर नगर आयुक्त व अन्य अफसरों को पक्षकार बनाया है। इस मामले में 23 मई को सुनवाई होनी है।
पार्षद ने बताया कि वर्ष 2022 में जब कार्रवाई की गई थी तो कई फड़ों के बारे में यह पता ही नहीं चल सका था कि उस पर किसका कब्जा है? तब नगर निगम ने खुद माना था कि इन दुकानों का कोई रजिस्ट्रेशन नहीं है, न ही वे निगम के किरायेदार थे। इस मामले को शासन के संदर्भित कर दिया गया था। कुछ समय पूर्व एक लाख रुपये प्रीमियम व 25 हजार रुपये जुर्माना लेकर इन दुकानों की न सिर्फ सील खोल दी गई, बल्कि उन्हें आवंटित भी कर दिया गया।
पार्षद ने नगर आयुक्त से इसकी शिकायत की तो उन्हें बताया गया कि बोर्ड की बैठक में प्रस्ताव रखकर इसे पास करवा लिया गया है। जबकि, पार्षद का कहना है कि बोर्ड की बैठक में उन्होंने इस प्रस्ताव का विरोध किया था। शिकायत मंडलायुक्त तक पहुंची तो नगर निगम की तरफ से बताया गया कि पार्षद का कोई अनुमोदक नहीं था। पार्षद ने बताया कि जयप्रकाश उनके अनुमोदक थे। जयप्रकाश ने अदालत में इसका शपथपत्र दिया है।
पार्षद ने पांच मई को हाईकोर्ट में नगर आयुक्त निधि गुप्ता वत्स, उप नगर आयुक्त पूजा त्रिपाठी व पूर्व अपर नगर आयुक्त अजीत सिंह के खिलाफ याचिका दाखिल की। इसमें 15 मई को बहस हुई थी। अब 23 मई को सुनवाई होगी।
सभी दुकानों का प्रीमियम एक लाख क्यों?
पार्षद का कहना है कि सभी दुकानों का क्षेत्रफल अलग-अलग है तो प्रीमियम एक लाख रुपये क्यों? दूसरा आरोप यह है कि जब खुद निगम ने मामले को शासन के लिए संदर्भित कर दिया तो वह उस मामले में कैसे दखल दे सकता है?