बाघिन को पकड़ने आई एक्सपर्ट की टीम।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
कहा- ईको टूरिज्म के विकास की काफी संभावनाएं लेकिन जनप्रतिनिधियों को शासन में करनी होगी पैरवी
बरेली। वन विभाग के अफसर भी रबर फैक्टरी को जंगल सफारी के तौर पर विकसित किए जाने की मुहिम से सहमत हैं। अफसरों का कहना है कि रबर फैक्टरी के हालात जंगल सफारी के लिए पूरी तरह उपयुक्त हैं। यहां ईको टूरिज्म के विकास की भी काफी संभावनाएं हैं। हालांकि इस मामले में जनप्रतिनिधियों की ओर कोई पहल किए बगैर कोई नतीजा हासिल करना मुमकिन नहीं है।
वन्य जीवों में दिलचस्पी रखने वाले लोगों की तरफ से करीब दो सालों से रबर फैक्टरी को जंगल सफारी बनाने की मांग की जा रही है। दरअसल इस मांग ने तबसे जोर पकड़ना शुरू किया जब यहां लगातार वन्य प्राणियों की आमद की खबरें आईं। कई साल पहले यहां एक बाघ आया था जो दो साल तक रबर फैक्टरी में रहा फिर भी किसी को उसकी भनक नहीं लगी। बाद में तेंदुओं और अब बाघिन ने यहां ठिकाना बनाया जिससे साबित हो गया कि फैक्टरी इन जानवरों के प्राकृतिक वास के लिए पूरी तरह उपयुक्त है। वन्य जीवों की जानकारी रखने वाले काजलदास गुप्ता के मुताबिक सालों पहलेे जब फैक्टरी का अस्तित्व नहीं था तब यहां सिर्फ जंगल थे। अब फिर यहां जंगल विकसित हो गया है। जंगल सफारी में तब्दील होने के बाद यहां लोगों को पर्यावरण, वन्य जीव और पक्षियों के बारे में भी जागरूक किया जा सकेगा।
फैक्टरी में जंगल सफारी बनाना मुश्किल नहीं
वन्य जीव प्रेमी अनिल साहनी कहते हैं कि फैक्टरी को जंगल सफारी बनाना बेहद आसान है। रबर फैक्टरी की सीमा पर आसानी से फेंसिंग हो जाएगी। अंदर काफी जंगल है ही, जहां पेड़ कम है वहां नए पौधे लगाकर जंगल विकसित किया जा सकता है। इससे एक ओर जहां प्रदूषण कम होगा तो दूसरी ओर बरेली में पर्यटन स्थल भी बन जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर जरूरी हुआ तो वह शासन स्तर तक बात पहुंचाएंगे। मामला अगर कोर्ट में है तो कोई निर्णय होने तक इसे सफारी बनाने की मांग कोर्ट से पीआईएल के जरिए करेंगे। हालांकि यह तभी हो पाएगा जब शहरवासियों का साथ मिले और वे मजबूत इरादों के साथ सहयोग करें।
अगर शासन सहमत है तो कोई मुश्किल नहीं
चीफ कन्जर्वेटर ललित वर्मा का कहना है कि अगर संसाधन मिलें तो फैक्टरी को जंगल सफारी बनाया जा सकता है। यह सही है कि फैक्टरी में कई प्रजाति के जीव रह रहे हैं जिन्हें न कोई दिक्कत है न उन्होंने इंसानों पर हमला किया है। इससे जाहिर है कि यहां उनके शिकार, पानी और आराम का पर्याप्त माहौल है। हालांकि जंगल सफारी बनाना आसान नहीं है। इसके लिए शासन मं जनप्रतिनिधियों को पहल करनी होगी। वह प्रस्ताव भेजें जिस पर निर्देश मिलेंगे तो फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार की जाएगी।