जरूरत के आधार पर तय होती है कीमत, लड़कों की मांग ज्यादा
आरोपी नर्स सीता का गिरोह लोगों की जरूरत के आधार पर बच्चों की कीमत तय करता है। सूत्रों के मुताबिक, अस्पतालों में हो रहे प्रसव व अनचाहे बच्चों के मामलों पर गिरोह नजर रखता है। कई बेहद गरीब दंपती को बच्चों की जरूरत नहीं होती। ऐसे में प्रसव के बाद वह बच्चों को सक्षम लोगों को देने से गुरेज नहीं करते।
कई मामलों में तो ऐसे अभिभावक बच्चों को देने के बदले कुछ लेना भी गलत समझते हैं, जबकि कुछ अभिभावकों को मामूली रकम देकर भेज दिया जाता है। ऐसे में आईवीएफ सेंटरों पर चक्कर लगाने वाले अभिभावक बिना किसी झंझट के मोटी रकम देेकर नवजात बच्चा पाने में ज्यादा भरोसा करते हैं।
उनकी आर्थिक हालत के आधार पर ही बच्चे की कीमत तय की जाती है। सर्वाधिक मांग व कीमत लड़के की होती है। सीता और उसके गिरोह के सदस्य भी लड़का चोरी करने और बेचने में ज्यादा मुनाफा पाते थे। जिन तीन बच्चों को बेचने के प्रमाण मिले हैं, वे तीनों लड़के ही हैं।