रुहेलखंड विश्वविद्यालय में मूल्यांकन में कर्मचारियों की सेंधमारी की पुष्टि हो गई है। विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं की शिकायत पर हुए पुनर्मूल्यांकन में तीन दर्जन से ज्यादा ऐसे परीक्षार्थियों के नाम सामने आए हैं जिन्हें दो-पांच नंबर ही मिले जबकि कापियों में उन्हें 40-46 तक अंक दिए गए। वहीं, इतने बड़े पैमाने पर गड़बड़ी मिलने के बाद जांच समिति अब बीएससी के सभी छात्र-छात्राओं के अंक अवॉर्ड शीट और मूल्यांकन चार्ट से मिलाने की तैयारी कर रही है।
पिछले दिनों विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने विश्वविद्यालय में हंगामा कर तीन कर्मचारियों पर मूल्यांकन में धांधली के आरोप लगाए थे। कुलपति प्रो. अनिल शुक्ल ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कर्मचारियों को तलब किया। उनके मोबाइल फोन की जांच की तो उसमें सांठगांठ के सबूत मिले। इसके बाद मामले की जांच के लिए उन्होंने प्रो. एके जैतली की निगरानी में कमेटी बना दी। तब से यह जांच जारी है और लगातार नए-नए खुलासे हो रहे हैं।
आरोप की पुष्टि के लिए जांच कमेटी ने बीएससी के कुछ अभ्यर्थियों की कापियों का पुनर्मूल्यांकन कराया। सूत्रों का कहना है कि सौ से अधिक कापियों की दो-दो शिक्षकों से जांच कराई गई तो इनमें से तीन दर्जन से अधिक छात्र-छात्राओं को दो से पांच अंक ही मिले जबकि कॉपियों में उन्हें 40-46 तक अंक दिए गए थे। अब इन परीक्षार्थियों को दोनों शिक्षकों के मूल्यांकन का औसत निकालकर अंक देने की तैयारी है। ऐसे में इनका फेल होना भी तय माना जा रहा है। दूसरी ओर, मूल्यांकन में धांधली पकड़ने के बाद विश्वविद्यालय अब इन परीक्षकों पर कार्रवाई करेगी और इनको डिबार किया जाएगा। साथ ही कार्रवाई के लिए इनके कॉलेजों को भी लिखा जाएगा।
एजेंसी और अवॉर्ड शीट की धांधली पकड़ने की तैयारी
बढ़े नंबरों की इस गड़बड़ी में अभी परीक्षकों की धांधली सामने आई है। जांच समिति को अंदेशा है कि जब सौ कॉपियों में इतनी गड़बड़ी सामने आई तो यह मामला और बड़ा हो सकता है। ऐसे में जांच समिति अवॉर्ड शीट और मूल्यांकन चार्ट का मिलान करने की तैयारी कर रही है। एजेंसी और कर्मचारियों से सेटिंग से मूल्यांकन चार्ट से अवॉर्ड शीट बनने तक भी धांधली की गई है। इस जांच में यह भी पकड़ा जाएगा, मगर इसके लिए मूल्यांकन विभाग से अनुमति मिलने की संभावना कम ही नजर आ रही है।