Now without a guard Train, new device
- फोटो : बरेली, अमर उजाला
मालगाड़ियों के लिए बनाए जा रहे ईस्टर्न और वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (डीएफसी) में जल्द ही गार्ड रहित ट्रेनें दौड़ती नजर आएंगी। ऐसा संभव होगा ईओटीटी सिस्टम के जरिए। इससे स्टाफ की कमी से जूझ रहे रेलवे को भी काफी राहत मिलेगी, तो वहीं गार्ड के डिब्बे के स्थान पर माल ढोनेे के लिए एक अतिरिक्त कोच भी लगाया जा सकेगा, जिससे राजस्व बढ़ेगा। एक ईओटीटी सिस्टम की कीमत करीब दस लाख रुपये है।
रेलवे के उच्चपदस्थ सूत्रों के मुताबिक डीएफसी गुड्स ट्रेनों के लिए एक महत्वपूर्ण कॉरिडोर बनने जा रहा है। विश्व की बेहतरीन तकनीक से बनाए जा रहे तीन हजार किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर का 56 किलोमीटर (बिहार में दुर्गावती से सासाराम) तक का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। आने वाले समय में इस कॉरिडोर पर जो भी गुड्स ट्रेन जाएगी वह ईओटीटी (एंड ऑफ ट्रेन टेलीमेट्री) सिस्टम से लैस होगी। इसी के तहत लगभग देश की एक हजार गुड्स ट्रेनों में यह सिस्टम लगाए जाने की शुरूआत होने जा रही है। इसमें बरेली से गुजरने वाली मालगाड़ियां भी शामिल हैं।
रेलवे अधिकारी के मुताबिक यह सिस्टम ट्रेन के पिछले हिस्से में लगेगा और पूरी ट्रेन पर नजर रखेगा। यानी सिस्टम के जरिए यह निगाह रखी जाएगी कि ट्रेन के किसी वैगन को खोला तो नहीं जा रहा या उसमें से कोई सामान निकालने की कोशिश तो नहीं की जा रही। वैसे अभी तक यह कार्य गार्ड ही किया करते थे, लेकिन नई व्यवस्था के तहत मालगाड़ियों में गार्ड रखने की जरूरत नहीं होगी। इसका एक फायदा यह भी होगा कि गार्ड के कोच के स्थान पर एक अतिरिक्त कोच माल ढोने के लिए लगाया जा सकेगा। इसके अलावा रेलवे में चल रही स्टाफ की किल्लत भी दूर होगी।
ईओटीटी ऐसे करेगा कार्य
गुड्स ट्रेन के इंजन में एक ट्रांसमीटर लगाया जाएगा और आखिरी डिब्बे में एक रिसीवर। ट्रांसमीटर और रिसीवर के बीच नियमित अंतराल पर सिग्नल का आदान-प्रदान होगा। इससे पता चलता रहेगा कि ट्रेन बगैर रुकावट के सभी डिब्बों के साथ दौड़ रही है। अगर पूरी ट्रेन में किसी भी कोच के बीच की कपलिंग अगर टूट जाती है तो सिग्नल का आदान-प्रदान रुक जाएगा और ट्रांसमीटर पर चालक को ट्रेन को रोकने का संकेत स्वत: ही मिल जाएगा। रेलवे बोर्ड इसका सफलता पूर्वक परीक्षण भी कर चुका है।
पायलट प्रोजेक्ट के तहत ईओटीटी सिस्टम गुड्स ट्रेनों में लगने से जहां गार्ड की कमी पूरी होगी, वहीं इन ट्रेनों में एक एक्सट्रा कोच भी लगाया जा सकेगा। इस सिस्टम के लिए रेलवे बोर्ड टेंडर आमंत्रित कर चुका है। करीब दस लाख की कीमत वाला यह सिस्टम पहले फेज में करीब एक हजार गुड्स ट्रेनों में लगाया जाएगा।
- राजेंद्र सिंह, पीआरओ इज्जतनगर मंडल