बीएससी की पढ़ाई पूरी कर चुके गोपाल व नीट की तैयारी कर रहीं लाएबा और काशिफा ने इसे बनाया है। वहीं, इस बार 12वीं पास की यास्मीन ने भी योगदान दिया है।
पांच साल की मेहनत के बाद इस ट्रेन को बनाने में सफलता मिल सकी है। गोपाल के पिता इस्लामिया गर्ल्स इंटर कॉलेज में कैंटीन संचालक हैं। गोपाल ने बताया कि यह मॉडल इंडियन लोकोमोटिव का लघु संस्करण है, जो केवल 250 मिलीलीटर पानी में 50 मीटर की दूरी तय करता है।
यह प्रयास मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसे अभियानों को भी मजबूती प्रदान करेगा। इसका इंजन पर्यावरण अनुकूल तकनीक पर निर्धारित है।