नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग (एनआईओएस) से 12वीं की पढ़ाई करने वाले छात्र भी अब एमबीबीएस में दाखिले के लिए नेशनल एलिजबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (नीट) में बैठ सकते हैं। मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एमएचआरडी) ने मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें एमसीआई ने दूरस्थ शिक्षा वाले छात्रों को नीट के लिए प्रतिबंधित कर दिया था।
नवंबर 2017 में एमसीआई ने आदेश जारी कर दूरस्थ शिक्षा वाले छात्रों को नीट देने से रोक लगाई थी। कहा था कि ओपन स्कूल के छात्रों को व्यावहारिक ज्ञान नहीं होता। वे फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी और इंग्लिश का नियमित कोर्स नहीं करते, इस कारण नीट में शामिल नहीं हो सकते। एनआईओएस के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. आलोक गुप्ता ने बताया कि पिछले सप्ताह ही एमएचआरडी ने एमसीआई के इस आदेश को खारिज कर इन छात्रों के लिए रास्ता खोल दिया है। छात्र अब नीट की परीक्षा दे सकते हैं। इतना ही नहीं विदेशों से भी मेडिकल की पढ़ाई करने के योग्य हैं।
तीस हजार से ज्यादा ने की थी शिरकत
नीट 2017 में एनआईओएस के करीब 30 हजार से ज्यादा छात्र-छात्राएं बैठी थीं। इसमें 870 ने सफलता पाई थी। इसके बाद इनके नीट में बैठने पर रोक लगा दी गई थी। अब एमएचआरडी ने तर्क दिया है कि रेगुलर पढ़ाई में फेल या सप्लीमेंट्री आने पर ही छात्र एनआईओएस से आवेदन करते हैं। ऐसे में इन छात्रों को नीट में शामिल होने से रोका नहीं जा सकता है।
नीट का एक ही रहेगा पेपर, नहीं बदलेगा पाठ्यक्रम
नीट 2018 के लिए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने स्पष्ट कर दिया है कि इस बार नीट के पाठ्यक्रम में कोई बदलाव नहीं किया जा रहा है। 2017 का पूरा पाठ्यक्रम एक जैसा ही लागू कर दिया जाएगा। इसके अलावा पिछली बार अलग-अलग प्रश्न पत्रों की वजह से हुई परेशानी को भी दूर करने के लिए बोर्ड एक सामान प्रश्न पत्र देश के सभी राज्यों में भेजेगा। भाषायी समस्या को दूर करने के लिए प्रश्न पत्र को ट्रांसलेट कर दिया जाएगा।