चुनाव आयोग ने अब सभी शराब कारखानों को हर दिन उत्पादन की जानकारी देना अनिवार्य कर दिया है। इसके साथ ही शराब दुकानों को स्टॉक और बिक्री भी उपलब्ध करानी होगी। आयोग के निर्देश से कारोबारियों में खलबली मची हुई है।
विधान सभा में शराब खपत पर आयोग ने निगरानी शुरू करा दी है। सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों से कहा गया है कि बड़ी मात्रा में खरीददारों को सूचीबद्ध किया जाए। मुख्य निर्वाचन अधिकारी टी. वैंक्टेश ने अपने परिपत्र में कहा है कि शराब कारखानों में होने वाले उत्पादन और सप्लाई ब्योरे को अब हर दिन तैयार किया जाए। किसी लाइसेंसी ने कारखानों से कितनी सप्लाई ली है और उसने कितनी बिक्री की इसका हिसाब भी रखें।
थोक खरीददारी पर निगरानी
चुनाव में बड़े पैमाने पर शराब इस्तेमाल होती है। इन दिनों मौसम भी अनुकूल है, इसलिए शराब बिक्री भी बढ़ना तय है। पिछले माह जिले में 65 प्रतिशत खपत दर्ज हुई है। इससे लगता है कि जनवरी और फरवरी में चुनावी प्रक्रिया में शराब मांग प्रतिशत इससे ज्यादा हो जाएगा। इसलिए आयोग ने कहा है ज्यादा मात्रा में शराब खरीदने वाले चिह्नित किए जाएं इसका ब्योरा अलग से रखा जाए।
30 प्रतिशत बढ़ोत्तरी पर अलर्ट
जिस दुकान पर पिछली बिक्री से तीस प्रतिशत ज्यादा शराब उठान हुआ उसे सूचीबद्ध किया जाएगा। आयोग ने माना है कि सामान्य से तीस प्रतिशत से ज्यादा बिक्री का मतलब चुनाव में इसका इस्तेमाल। इसलिए ऐसे ग्राहकों का नाम-पता भी रजिस्टर में दर्ज होगा।
दुकानों पर स्टाक बोर्ड अनिवार्य
सभी अंग्रेजी और देशी शराब दुकानों पर स्टाक बोर्ड लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। खरीद-बिक्री की सारी डिटेल जिला आबकारी अधिकारी हर दिन निर्धारित प्रोफार्मा पर आयोग और आबकारी विभाग में उपलब्ध कराएंगे।
‘प्रदेश निर्वाचन अधिकारी और आबकारी मुख्यालय से मिले निर्देश के अनुसार शराब बिक्री, उत्पादन और सप्लाई संबंधी सूचनाएं हर दिन बनाना शुरू कर दी हैं। सूचना नियमित निर्धारित प्रोफार्मा पर दी जाएगी।’
- एसपी तिवारी, उपायुक्त, आबकारी विभाग