बरेली। रुविवि के परीक्षा फॉर्म भरने की अंतिम तिथि 18 अक्तूबर है, जबकि कॉलेज में फॉर्म जमा करने की अंतिम तिथि 19 अक्तूबर निर्धारित है। अंतिम दिनों में विद्यार्थियों को फॉर्म भरने और जमा करने में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। समर्थ पोर्टल पर विषयों के विकल्प न मिलने से भी विद्यार्थी चिंतित हैं।
शुक्रवार को बरेली कॉलेज में परीक्षा फॉर्म जमा करने के लिए सुबह आठ बजे से ही लंबी कतारें लग गईं। बीए, बीएससी और बीकॉम के तीनों सेमेस्टर के लिए केवल एक-एक काउंटर होने से दोपहर तक विद्यार्थियों को काफी इंतजार करना पड़ा। दोपहर दो बजे कर्मचारियों के लंच पर जाने से छात्राओं की चिंता बढ़ गई। छात्राओं ने कहा कि रोजाना सुबह आठ बजे से यहां लाइन लगनी शुरू हो जाती है। यदि वे वापस लौटती हैं, तो अगले दिन भी उन्हें उतना ही इंतजार करना पड़ेगा। चीफ प्रॉक्टर ने बताया कि बीए और बीएससी के छात्रों की संख्या सर्वाधिक है। उन्होंने बताया कि दोपहर बाद एक-एक काउंटर बढ़ा दिया गया। छात्रवृत्ति फॉर्म जमा करने वाले छात्रों की संख्या बृहस्पतिवार के मुकाबले कम रही।
परीक्षा फॉर्म में आ रहीं त्रुटियां
रुहेलखंड विश्वविद्यालय के स्नातक और परास्नातक विषम सेमेस्टर के परीक्षा फॉर्म समर्थ पोर्टल के माध्यम से भरे जा रहे हैं। छात्रों को सर्वाधिक समस्या विषय न मिलने की आ रही है। बीए में शिक्षा को माइनर विषय लेने वाले छात्रों को विकल्प नहीं दिख रहे हैं। इसी तरह राजनीतिशास्त्र और एमकॉम के भी कई विषय पोर्टल पर उपलब्ध नहीं हैं। इससे छात्र-छात्राएं अपने फॉर्म नहीं भर पा रहे हैं। रुविवि के परीक्षा नियंत्रक अनिल कुमार यादव ने बताया कि समर्थ पोर्टल से संबंधित सभी समस्याओं को सुलझाया जा रहा है। यदि किसी विद्यार्थी का मामला सीधे संज्ञान में आता है, तो उसे तुरंत समर्थ पोर्टल से ठीक कराया जा रहा है। उन्होंने आश्वासन दिया कि ये त्रुटियां धीरे-धीरे खत्म हो जाएंगी।
सुबह आठ बजे से सभी सेमेस्टर के फॉर्म एक ही काउंटर पर जमा हो रहे हैं, इसी कारण देर लग रही है। विद्यार्थियों की परेशानी को देखते हुए शुरू से कॉलेज को काउंटर की संख्या बढ़ानी चाहिए थी। - मानसी कोहली, छात्रा
मैं सुबह नौ बजे कॉलेज में फॉर्म जमा करने आई थी। इस दौरान फॉर्म कुछ गलती निकल आई। उसे सही कराने के बाद दोबारा लाइन में लगना पड़ा। फॉर्म जमा करने का काम बेहद धीमा चल रहा है। - काजल, छात्रा
अगर हर सेमेस्टर के छात्रों के लिए अलग-अलग काउंटर खुल जाएं तो इतनी समस्या नहीं आएगी। सर्वाधिक संख्या जेडबीसी व बीए में है। इसलिए इतनी लंबी लाइन लग रही है। - नेहा, छात्रा