Not only will you have more than three million cash penalty
- फोटो : बरेली, अमर उजाला
भारतीय लोक प्रशासन संस्थान की स्थानीय शाखा ने बरेली कॉलेज के हाल में केंद्र सरकार के आम बजट पर चर्चा की। तीन सीए की कसौटी पर बजट पास हो गया। सभी ने बजट को अच्छा बताने के अपने- अपने तर्क रखे। बताया गया कि बजट में कृषि पर ध्यान दिया गया है। इससे रोजगार तो बढ़ेगा ही साथ ही टैक्स भी अच्छा आएगा। मैट्रो पॉलिसी बनाए जाने से टू टियर वाले शहरों में शामिल बरेली को भी फायदा मिलने की उम्मीद जगी है।
अप्रत्यक्ष कर पर सीए कपिल वैश्य ने बताया कि इसमें कुछ बदलाव हुए हैं लेकिन जीएसटी आने वाला है। इससे निर्माता, विक्रेता और उपभोक्ताओं को काफी फायदा होगा। टैक्स का कलेक्शन बढ़ जाएगा। प्रत्यक्ष कर पर रविंद्र अग्रवाल ने बताया कि इस टैक्स में कोई बदलाव नहीं है। उन्होंने कैश पर उठाए गए केंद्र के कदम को साफ किया। बताया कि लोग तीन लाख ही नहीं बल्कि 10 हजार रुपए का कैश नहीं दे सकते हैं। जिनका बिजनेस नहीं है अगर पर्सनल तौर पर तीन लाख रुपए से अधिक का कैश कुछ खरीदने के लिए देना चाहते हैं तो नहीं दे सकते। तीन लाख रुपए से अधिक का कैश दिया तो उतना ही जुर्माना भी लगेगा। उन्होंने बताया कि पहले गोल्ड और प्रॉपर्टी को तीन साल होल्ड करने के बाद लांग टर्म कैपिटल गेन टैक्स प्राप्त होता था। अब यह दो साल का हो गया है। यानी दो साल ही होल्ड करना पड़ेगा इससे फायदा होगा। सीए राजेन विद्यार्थी ने बताया कि भगोड़े लोगाें की संपत्ति को जब्त करने के लिए नया कानून आएगा जो अच्छा होगा। इंजीनियर सुरेश सुंदरानी ने बताया कि भ्रम है कि हर 50 करोड़ से नीचे वाली कंपनी को 5 फीसदी टैक्स में छूट मिलेगी बल्कि यह छूट केवल कंपनी बनाने वालों के लिए है। एमएसएमई इस दायरे में नहीं आते। यह इसलिए किया गया है ताकि लोग कंपनी बनाएं और सरकार के दायरे में आए। कंपनी पर सरकार का नियंत्रण अधिक होता है। पार्टनरशिप के व्यापार में इसका फायदा नहीं मिलेगा। उन्होंने स्किल डवलपमेंट में बजट बढ़ने से इंडस्ट्री को फायदा होने और मेट्रो को टू टियर में महत्व देने से बरेली में आने की संभावना जगी है। कार्यक्रम में अध्यक्ष डॉ. एके चौहान ने भारतीय नागरिक की मानसिकता में परिवर्तन की जरूरत बताई। इस दौरान भारत भूषण शील, एनके शर्मा, मिथिलेश मिश्रा, पूर्णिमा अनिल, पूनम सिंह, शशिबाला राठी, ऊषा उप्पल, रजनी गुप्ता, निलिमा व अन्य शामिल रहे।