हाफिजगंज। भट्ठा मजदूर पर हमला करने के चौथे दिन भी वन विभाग की ओर से तेंदुए को पकड़ने के लिए कोई इंतजाम नहीं किया गया। हालांकि एक दिन पहले तक अफसर पिंजड़ा लगाने की बात कह रहे थे, लेकिन रविवार को अफसर बोले- यदि दोबारा तेंदुआ किसी ग्रामीण पर हमला करेगा, तभी उसे पकड़ने के लिए पिंजड़ा लगाया जाएगा। लिहाजा अब वन विभाग को तेंदुआ पकड़ने के लिए एक और ग्रामीण की जान जोखिम में पड़ने का इंतजार है।
बृहस्पतिवार को ग्रेम गांव के भट्ठा मजदूर हरपाल को तेंदुए ने हमला कर घायल कर दिया था। शनिवार को राजघाट की रहने वाली सरस्वती देवी ने बहगुल नदी के किनारे झाड़ियों में तेंदुआ बैठा देखा था। अचानक सामने तेंदुआ देख वह चीखती हुई भाग खड़ी हुई थीं। ग्रामीणों के पहुंचने पर उनकी जान बच पाई थी। घटना की सूचना पर वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर तेंदुए के पगचिह्न देखे थे। ग्रामीणों के सहयोग से टीम ने लाठी डंडे लेकर तेंदुए की तलाश भी की, लेकिन तब तक वह दूर जा चुका था। क्षेत्रीय वनकर्मियों ने तेंदुआ पकड़ने के लिए पिंजड़े की मांग की थी। इसी के चलते रविवार को टीम पिंजड़ा आने की आस लगाए बैठी रही, लेकिन शाम तक पिंजड़ा नहीं आया। वन कर्मियों के मुताबिक अफसरों का कहना है कि अगर दोबारा तेंदुआ किसी व्यक्ति पर हमला करेगा तो उसे पकड़ने के लिए पिंजड़ा लगाया जाएगा। अभी कांबिंग करके ही नजर रखी जाए।
कहीं ग्रामीणों के गुस्से का शिकार न हो जाए तेंदुआ
वन विभाग की लापरवाही से जहां ग्रामीणों की जान जोखिम में है, वहीं तेंदुए की जान पर भी खतरा मंडरा रहा है। वन विभाग की इसी हीलाहवाली के चलते 30 मई 2019 को चार किसानों पर हमला करने से गुस्साए उदरनपुर और कमुआ गांव के ग्रामीणों ने ट्रैक्टरों से घेरकर तेंदुए को मार डाला था। अब फिर वन विभाग तेंदुए को पकड़ने के लिए कोई पुख्ता कदम नहीं उठा रहा, जिससे ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।